CJP Parliament March: प्रदर्शनकारियों के संसद मार्च के बीच जेपी नड्डा से CJP प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात, ज्ञापन सौंपकर रखीं मांगें
जेपी नड्डा के साथ CJP प्रतिनिधिमंडल
CJP Parliament March: शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं की जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच सोमवार को प्रस्तावित संसद मार्च के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की, जबकि दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर रखी थी। पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना क्षेत्र के आसपास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की स्थिति बनी। घटनास्थल से लाठीचार्ज और भीड़ को तितर-बितर करने के प्रयासों की तस्वीरें और वीडियो सामने आए। पुलिस का कहना है कि मार्च के लिए अनुमति नहीं थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता थी।
जेपी नड्डा से मिला CJP प्रतिनिधिमंडल, सौंपा ज्ञापन
दिनभर चले घटनाक्रम के बीच CJP के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों से जुड़ा विस्तृत ज्ञापन उन्हें सौंपा। जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों की ओर से बातचीत का प्रस्ताव मिला था। उनके अनुसार सुबह करीब 11:50 बजे से चर्चा शुरू हुई और बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि शाम करीब चार बजे ज्ञापन सौंपा गया और प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त कर सामान्य स्थिति बहाल करने में सहयोग करने का अनुरोध किया गया।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के दावों में बड़ा अंतर
संसद मार्च के दौरान हुई कार्रवाई को लेकर प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बयान अलग-अलग हैं। सोशल मीडिया पर 12 वर्षीय एक बच्ची पर कथित हमले, बाल खींचे जाने और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने के दावे सामने आए। दिल्ली पुलिस ने इन दावों को गलत बताते हुए कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई। पुलिस ने यह भी कहा कि 40 से 50 लोगों के सिर फूटने जैसी खबरें तथ्यात्मक नहीं हैं और लोगों से अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा नहीं करने की अपील की। वहीं, प्रदर्शनकारी पक्ष ने पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए और बल प्रयोग का दावा किया।
डिंपल यादव और अरविंद केजरीवाल ने उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर घटना बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ अनुचित व्यवहार किया गया और सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की मांग भी दोहराई। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में युवा अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे हैं और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए। उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सरकार से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की।
अभिजीत दीपके को लेकर सामने आए अलग-अलग दावे
मार्च के दौरान CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए। कुछ रिपोर्टों में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने उनकी गाड़ी को रोका और नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई। हालांकि CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने स्पष्ट किया कि अभिजीत दीपके को न तो हिरासत में लिया गया और न ही गिरफ्तार किया गया। उनके अनुसार वह सुरक्षित हैं और संगठन की ओर से सरकार के साथ बातचीत की प्रक्रिया जारी है।
मध्य दिल्ली में यातायात प्रभावित
प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था के चलते मध्य दिल्ली के कई हिस्सों में लंबा जाम देखने को मिला। विशेष रूप से कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में वाहनों की आवाजाही काफी देर तक प्रभावित रही। पुलिस ने लोगों से वैकल्पिक मार्ग अपनाने की अपील की, जबकि सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रहीं।
सोनम वांगचुक के आंदोलन की पृष्ठभूम
यह पूरा आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इससे जुड़े आंदोलन के दौरान लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहे थे। उनके स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार को हुए घटनाक्रम के बाद अब सभी की नजर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच आगे होने वाली बातचीत और संभावित समाधान पर बनी हुई है।
