Jind News: जींद की होनहार बेटी आरजू का NEET में कमाल, सब्जी बेचने वाले पिता का सिर गर्व से किया ऊंचा
जींद की होनहार बेटी आरजू का NEET में कमाल
Jind News: ‘हौसले बुलंद हों तो गरीबी और बंदिशें भी रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकतीं’—इस कहावत को जींद की बेटी आरजू ने सच साबित कर दिखाया है। एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली आरजू ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शुमार नीट (NEET) में 6227वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। सब्जी बेचने वाले की बेटी की इस कामयाबी ने न सिर्फ उसके परिवार के चेहरे पर मुस्कान ला दी है, बल्कि पूरे जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा का नया अध्याय लिख दिया है।
तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी आरजू की इस सफलता के पीछे सालों का त्याग, कड़ी तपस्या और परिवार का अटूट विश्वास छिपा है। घर में आर्थिक तंगी का साया हमेशा रहा, लेकिन आरजू ने कभी अपने सपनों से समझौता नहीं किया। आज जब उसका चयन सरकारी मेडिकल कॉलेज के लिए हुआ है, तो पूरे मोहल्ले और जींद जिले में जश्न का माहौल है।
दादा की मौत ने बदला जिंदगी का मकसद, बचपन में ही लिया डॉक्टर बनने का संकल्प
आरजू की इस कामयाबी के पीछे एक भावुक और दर्दनाक कहानी जुड़ी है। आरजू जब छठी कक्षा में पढ़ती थीं, तब उनके दादा गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। आर्थिक तंगी के कारण परिवार अस्पतालों के चक्कर काटता रहा, लेकिन समय पर सही इलाज न मिल पाने की वजह से दादा ने उनकी आंखों के सामने ही दम तोड़ दिया।
इस घटना ने मासूम आरजू के मन-मस्तिष्क पर गहरा असर डाला। उसी दिन आरजू ने अपने आंसुओं को अपनी ताकत बनाया और मन ही मन संकल्प लिया कि वह डॉक्टर बनेगी, ताकि किसी भी गरीब और मजबूर इंसान को इलाज के अभाव में अपना स्वजन न खोना पड़े।
सब्जी बेचकर पिता ने जोड़े पाई-पाई, बेटी ने त्याग से हासिल किया मुकाम
आरजू के पिता जींद की गलियों और मंडी में सब्जी बेचकर परिवार का पेट पालते हैं। उन्होंने बताया कि सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने कभी बेटियों की पढ़ाई के बीच गरीबी को नहीं आने दिया। सब्जी बेचकर जो भी बचत होती थी, उसे बेटी की किताबों और कोचिंग की फीस में लगा दिया जाता था। पिता को हमेशा भरोसा था कि बचपन से पढ़ाई में अव्वल रहने वाली उनकी बेटी एक दिन उनका सिर गर्व से ऊंचा करेगी।
दूसरी तरफ, आरजू ने भी पिता के पसीने की हर एक बूंद की कीमत समझी। अपने लक्ष्य को पाने के लिए आरजू रोजाना 6 से 8 घंटे तक जी-तोड़ पढ़ाई करती थीं। दोस्तों की बर्थडे पार्टियां हों या रिश्तेदारों के शादी-समारोह, आरजू ने हर सामाजिक आयोजन से खुद को पूरी तरह काट लिया था। इस लगन का नतीजा आज सबके सामने है, आरजू अब एक काबिल डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करने के अपने सपने की ओर कदम बढ़ा चुकी हैं।
