July 21, 2026

‘संसद चलो’ प्रदर्शन में लाठीचार्ज और आंसू गैस के आरोप, AILAJ ने पुलिस कमिश्नर से की कार्रवाई की मांग

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'संसद चलो' प्रदर्शन में लाठीचार्ज और आंसू गैस के आरोप, AILAJ ने पुलिस कमिश्नर से की कार्रवाई की मांग

'संसद चलो' प्रदर्शन: AILAJ ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल, घायल प्रदर्शनकारियों के मुआवजे की मांग

दिल्ली में 20 जुलाई को हुए ‘संसद चलो’ प्रदर्शन को लेकर पुलिस पर कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बरता का आरोप लगा है। ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस (AILAJ) ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को शिकायत देकर कथित कार्रवाई की स्वतंत्र जांच, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ FIR और घायल प्रदर्शनकारियों को चिकित्सा सहायता व मुआवजे की मांग की है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

AILAJ की ओर से उसके सदस्य एडवोकेट सुपंथ सिन्हा ने यह शिकायत दाखिल की है। शिकायत में दावा किया गया है कि प्रदर्शन में छात्र, युवा, महिलाएं और आम नागरिक शामिल थे और प्रदर्शन शांतिपूर्ण था। संगठन के मुताबिक, प्रदर्शन का आह्वान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया था।

हालांकि, शिकायत में लगाए गए पुलिस कार्रवाई और अन्य आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

आंसू गैस और लाठीचार्ज को लेकर क्या आरोप हैं?

AILAJ ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने कथित तौर पर आंसू गैस के गोले छोड़े और कई बार लाठीचार्ज किया। संगठन का दावा है कि इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए।

शिकायत में कहा गया है कि घायलों में छात्र और नाबालिग भी शामिल थे। AILAJ का आरोप है कि कुछ लोगों को लाठियों से कथित तौर पर पीटा गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कुछ प्रदर्शनकारियों को प्रदर्शन स्थल से हटने के बाद या विरोध करने की स्थिति में नहीं होने के बावजूद कथित तौर पर पीटा गया।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस की ओर से इस शिकायत और लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया की जानकारी सामने आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

‘बाहरी लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर हमला किया’

AILAJ ने प्रदर्शन स्थल पर कुछ ऐसे लोगों के पहुंचने का भी आरोप लगाया है, जिन्हें संगठन ने ‘बाहरी’ और हिंसक उपद्रवी बताया है। शिकायत में दावा किया गया है कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री के आधार पर इन लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर पत्थर फेंके और लाठियों से हमला किया।

संगठन ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस इन कथित हमलों को रोकने और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रही। AILAJ ने पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच और कथित हमलावरों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

AILAJ ने दिल्ली पुलिस से क्या मांगें की हैं?

AILAJ ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से मामले की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। संगठन ने उन पुलिस अधिकारियों की पहचान करने की भी मांग की है, जिन्होंने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग का आदेश दिया, उसमें हिस्सा लिया या उसे बढ़ावा दिया।

शिकायत में जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर निष्पक्ष आपराधिक जांच की मांग की गई है। इसके साथ ही, जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की मांग भी रखी गई है।

AILAJ ने कथित बाहरी हमलावरों की पहचान कर उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, उन पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है, जिन पर कथित हमलों को रोकने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है।

संगठन ने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए लोगों को उचित चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने, उनकी चोटों का आधिकारिक दस्तावेजीकरण करने और उचित मुआवजा देने की मांग भी की है।

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शांतिपूर्ण प्रदर्शन को लेकर AILAJ ने क्या कहा?

AILAJ ने अपनी शिकायत में कहा है कि सरकार की आलोचना करना, शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना और सार्वजनिक अधिकारियों से जवाबदेही की मांग करना नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हिस्सा है। संगठन का कहना है कि इन अधिकारों का इस्तेमाल करने वाले नागरिकों के खिलाफ पुलिस बल का कथित दमनकारी इस्तेमाल लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन के अनुरूप नहीं है।

मामले में अब पुलिस की ओर से शिकायत पर की जाने वाली कार्रवाई अहम होगी। यदि जांच शुरू होती है तो प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, कथित बल प्रयोग, प्रदर्शनकारियों के घायल होने और कथित बाहरी हमलावरों से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

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