दस साल में मिली वार मेमोरियल की ड्राइंग अप्रूवल, फाइल विभाग के लगा रही थी चक्कर
नारनौल के गांव नसीबपुर में बनाया गया प्रतीकात्मक शहीद स्मारक
दस साल में मिली वार मेमोरियल की ड्राइंग अप्रूवल, फाइल विभाग के लगा रही थी चक्कर
जगमार्ग ब्यूरो नारनौल। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान गांव नसीबपुर के ऐतिहासिक मैदान में शहीद हुए वीर योद्धाओं की याद में बनाए जा रहे वार मेमोरियल पार्क की अप्रूवल मिल गई है। सरकार से अप्रवूल लेने के लिए दस साल का समय लग गया। अब यह पार्क 12 एकड़ की बजाय पांच एकड़ में बनाया जाएगा। पिछले कई वर्षों से यह पार्क फाइलों में उलझा पड़ा था। इसकी फाइल एक विभाग से दूसरे विभाग के चक्कर लगा रही थी। अब कैबिनेट मंत्री आरती राव और नारनौल विधायक ओमप्रकाश यादव के प्रयासों के बाद मुख्यमंत्री ने ड्राइंग अप्रूवल दे दी है। अब लोक निर्माण विभाग इसका अस्टिमेट तैयार कर सरकार को भेजेगा, उसके बाद इसके टेंडर लगाए जाएंगे। अधिकारियों की माने तो पांच एकड़ में बनने वाले वार मेमोरियल का निर्माण कार्य शुरू होने में लगभग छह महीने का वक्त और लग सकता है।
बता दें कि 1857 की क्रांति के दौरान नारनौल से दो किलोमीटर दूर महेंद्रगढ़ रोड पर स्थित नसीबपुर के मैदान में अहीरवाल के रणबांकुरों ने अंग्रेजों के साथ जमकर युद्ध किया था। इस युद्ध का नेतृत्व राजा रावतुलाराम और राजा गोपालकृष्ण ने किया था। देश की आजादी के लिए लड़े जा रहे इसयुद्ध में पांच हजार योद्धाओं ने अपनी शहादत दे दी थी। इन युद्ध में अहीरवाल के योद्धाओं का इतना खून बहा की पूरी धरती खून से लाल हो गई थी। उन वीर रणबांकुरों की वीरगाथा को याद करने के नाम यहां एक स्मारक का निर्माण करवाया गया है।
दस साल पहले की थी वार मेमोरियल की घोषणा:
इस वार मेमोरियल की घोषणा 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने की थी। इस वार मेमोरियल बनाने का मुख्य उद्देश्य देश की भावी पीढ़ी को इन योद्धाओं की वीरगाथा से अवगत करवाना है। दस साल के दौरान स्थानीय विधायक ओमप्रकाश यादव, सांसद चौधरी धर्मबीर सिंह तथा केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने इसको बनवाने के लिए काफी प्रयाय किए लेकिन अधिकारियों की लापवारी की वजह से अभी तक यह मेमोरियल नहीं बन पाया।
दस साल फाइल विभागों के लगा रही थी चक्कर:
सीएम ने घोषणा के बाद इस वॉर मैमोरियल पार्क एवं ओपन थियेटर का निर्माण करवाने की जिम्मेदारी पंचायत राज विभाग को सौंपी थी। लगभग दो साल पंचायती राज के पास फाइनल रहने के बाद जमीन तक ट्रांसफर नहीं हो पाई थी। इसके बाद यह फाइल पंचायत विभाग से लेकर टूरिज्म को भेज दी गई थी। कुछ सालों तक टूरिज्म विभाग के पास फाइल पड़ी रही। बाद में बाद में सरकार ने इस फाइल को हाउसिंग कारपोरेशन को सौंप दिया था। जब हाउसिंग कारपोरेशन भी यह प्रोजेक्ट नहीं बनवा पाई। अब सरकार ने लगभग एक साल से लोक निर्माण विभाग को दिया है। लोक निर्माण विभाग को सरकार से ड्राइंग अप्रूवल मिल चुकी है। अब आगे की कार्रवाई जा रही है।
पार्क बनने के बाद ये रहेंगे आकर्षण का केंद्र:
शुरुआत में वार मेमोरियल 12 एकड़ में बनाया जाना था लेकिन अब यह पांच एकड़ में बनाया जाएगा। सरकार की घोषणा के अनुसार यहां वॉर मैमोरियल पार्क के अलावा ओपन थियेटर का निर्माण करवाया जाएगा। इस प्रस्तावित वॉर मैमोरियल पार्क के दो भव्य स्वागत द्वार बनाए जाएंगे। मेमोरियल पार्क में घोड़े पर सवार राजा राव तुलाराम, राजा कृष्ण गोपाल तथा दूसरे रणबांकुरों का स्टैच्यू बनाया जाएगा। इसके साथ ही अंग्रेजी सेना के नायक रहे जनरल जे जैराड ब्रिगेडियर शावर्स की कब्र का भी पुर्नर विकास किया जाएगा। वॉर मेमोरियल पार्क के निकट एक संग्रहालय बनाया जाएगा। जिसमें वर्ष 1947 से लेकर अब तक देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए शहीद हुए जिले में सैनिकों का जीवन परिचय भी अंकित किया जाएगा। इसके अलावा अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त ओपन एयर थियेटर तथा पुस्तकालय का निर्माण भी करवाया जाएगा। यहां फिलहाल शहीदों की याद में एक प्रतीकात्मक स्मारक बना हुआ है।
वर्जन:
लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन अश्वनी गहलावत ने बताया कि वार मेमोरियल की ड्राइंग अप्रूवल आ गई है। अब इसका अस्टिमेट बनाकर सरकार को भेजा जाएगा। अगर सबकुछ ठीक रहा तो छह महीने पर इसका निर्माण कार्यशुरू करवा दिया जाएगा।
