July 26, 2026

GMCH-32 Chandigarh: चंडीगढ़ GMCH-32 में 99 में से 64 वेंटिलेटर बंद मामले में मनीष तिवारी ने लोकसभा में उठा मामला

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GMCH-32 Chandigarh: चंडीगढ़ GMCH-32 में 99 में से 64 वेंटिलेटर बंद मामले में मनीष तिवारी ने लोकसभा में उठा मामला

चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल

GMCH-32 Chandigarh: चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (GMCH-32) में क्रिटिकल केयर सेवाओं से जुड़ा अहम मामला अब संसद तक पहुंच गया है। चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में अस्पताल में बड़ी संख्या में खराब पड़े वेंटिलेटरों का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि कोविड-19 महामारी के दौरान उपलब्ध कराए गए जीवन रक्षक उपकरण आखिर उपयोग में क्यों नहीं हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब 99 में से 64 वेंटिलेटर बंद पड़े हैं तो गंभीर मरीजों के इलाज की व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जा रही है। लोकसभा में दिए गए जवाब के बाद अस्पताल में मेडिकल उपकरणों के रखरखाव और क्रिटिकल केयर सेवाओं की स्थिति पर चर्चा तेज हो गई है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब सरकारी अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।

 

लोकसभा में केंद्र सरकार ने बताया वेंटिलेटरों की स्थिति

सांसद मनीष तिवारी के सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने GMCH-32 को कुल 99 वेंटिलेटर उपलब् कराए थे। मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में इनमें से केवल 35 वेंटिलेटर ही चालू हालत में हैं, जबकि 64 वेंटिलेटर खराब होने के कारण इस्तेमाल नहीं किए जा रहे हैं।

 

कोविड के दौरान मिले थे जीवन रक्षक उपकरण

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान देशभर के सरकारी अस्पतालों में गंभीर मरीजों के इलाज की क्षमता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने मुफ्त वेंटिलेटर उपलब्ध कराए थे। इसी योजना के तहत GMCH-32 को भी 99 वेंटिलेटर दिए गए थे ताकि आपात स्थिति में मरीजों को तत्काल जीवन रक्षक उपचार उपलब्ध कराया जा सके। अब बड़ी संख्या में इनके बंद होने से अस्पताल की क्रिटिकल केयर क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।

 

तकनीकी स्टाफ और रखरखाव पर भी उठे सवाल

मनीष तिवारी ने केवल वेंटिलेटरों की खराब स्थिति का मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में वेंटिलेटर तकनीशियनों और अन्य तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता पर भी सवाल किए। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या अस्पताल में पर्याप्त प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ मौजूद है, जिससे वेंटिलेटरों का नियमित रखरखाव और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही उन्होंने सेक्टर-16 स्थित सरकारी मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल (GMSH-16) में उपलब्ध वेंटिलेटरों, तकनीकी कर्मचारियों और दोनों अस्पतालों में नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ की स्थिति की जानकारी भी मांगी।

 

स्वास्थ्य मंत्रालय बोला- स्टाफ की कोई कमी नहीं

लोकसभा में दिए गए जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन के स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार GMCH-32 और GMSH-16 में नर्सिंग तथा पैरामेडिकल स्टाफ की कोई कमी नहीं है। मंत्रालय के अनुसार दोनों अस्पतालों में जरूरत के अनुरूप पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध है और मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जा रही है। हालांकि, मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि GMCH-32 में उपलब्ध 99 वेंटिलेटरों में से 64 वर्तमान में कार्यरत नहीं हैं।

 

क्रिटिकल केयर व्यवस्था पर बढ़ी चिंता

क्रिटिकल केयर में वेंटिलेटर सबसे महत्वपूर्ण जीवन रक्षक उपकरणों में शामिल हैं। बड़ी संख्या में इनके बंद रहने से भविष्य में गंभीर मरीजों के इलाज की क्षमता प्रभावित होने की आशंका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोकसभा में मामला उठने के बाद अब अस्पताल में मेडिकल उपकरणों के रखरखाव, मरम्मत व्यवस्था और उनकी नियमित निगरानी को लेकर भी ध्यान बढ़ने की संभावना है।

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