Bhupinder Hooda: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, भूपेंद्र हुड्डा बोले- “बहुत देर से लिया फैसला, पहले ही हट जाना चाहिए था”
धर्मेंद्र प्रधान ने छोड़ा शिक्षा मंत्री का पद, हुड्डा बोले- युवाओं के भारी विरोध के आगे झुकने को मजबूर हुई सरकार
Bhupinder Hooda: देश भर में नीट (NEET) परीक्षा की धांधली को लेकर मचे भारी बवाल और दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बीच आखिरकार केंद्र सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा है। शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पिछले कई हफ्तों से देश भर के छात्र, अभिभावक और विपक्षी पार्टियां लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग पर अड़े हुए थे।
“यह कदम बहुत देर से उठाया गया”: भूपेंद्र सिंह हुड्डा
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए।
उन्होंने चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा बहुत देर से लिया गया निर्णय है। देश भर के युवाओं ने सड़कों पर पुलिस की लाठियां खाईं, वे चोटिल हुए और तब जाकर सरकार की नींद खुली। जब सरकार ने देख लिया कि युवाओं का आक्रोश अब थमने वाला नहीं है, तब जाकर यह कदम उठाया गया। उन्हें तो नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए बहुत पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था।”
“अब संसद में गतिरोध खत्म होगा और होगी चर्चा”
हुड्डा ने आगे कहा कि संसद के जारी सत्र में बने गतिरोध की मुख्य वजह ही शिक्षा मंत्री का पद पर बने रहना था। विपक्ष लगातार इस बात पर अड़ा था कि पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो, उसके बाद ही नीट घोटाले और छात्रों के भविष्य पर आगे कोई सार्थक चर्चा हो सकती है। हुड्डा ने कहा कि अब जब इस्तीफा हो चुका है, तो संसद के भीतर देश के लाखों होनहार छात्रों के हक में खुलकर चर्चा का रास्ता साफ हो गया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने पत्र में लिखा- ‘देश के छात्र कानूनी पचड़े में न फंसें’
दूसरी ओर, पद से इस्तीफा देते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने देश के युवाओं के नाम एक पत्र जारी किया। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि जंतर-मंतर और देश भर में बने नाजुक हालातों का कोई देशविरोधी तत्व गलत फायदा न उठा सके और हमारे छात्र कानूनी अड़चनों में फंसने के बजाय अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें, इसीलिए उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र सौंपा है।
उन्होंने आगे लिखा कि वे पिछले चार दशकों से शिक्षा सुधारों और छात्र हितों से जुड़े रहे हैं और देश के युवाओं की भावनाओं का गहराई से सम्मान करते हैं।
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