Sonipat News: सोनीपत में अनोखा प्रदर्श, हाथों में लोहे की बेड़ियां बांधकर नीट पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरे कांग्रेस कार्यकर्ता
सोनीपत में नीट धांधली के खिलाफ हुंकार, कांग्रेस नेताओं ने कहा- 'पेपर लीक रोकने के लिए बने सख्त कानून'
Sonipat News: नीट (NEET) परीक्षा में हुई धांधली और दिल्ली में अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे बेकसूर छात्रों पर पुलिसिया लाठीचार्ज का विरोध अब सड़कों पर नए रंग में दिखने लगा है।
हरियाणा के सोनीपत में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक बेहद अनोखे और सांकेतिक अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता अपने हाथों में लोहे की बेड़ियां पहनकर सड़कों पर उतरे और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर गर्जना की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आज देश का युवा और छात्र खुद को बेड़ियों में जकड़ा हुआ महसूस कर रहा है।
पेपर लीक पर बने सख्त कानून, दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे कांग्रेस नेता संजय बड़वासनिया ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि नीट पेपर लीक जैसे गंभीर घोटालों ने लाखों होनहार युवाओं के भविष्य पर पानी फेर दिया है।
उन्होंने कहा, “सरकार केवल खोखले वादे करके छात्रों के आक्रोश और उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की फिराक में है। लेकिन हम यह तानाशाही बर्दाश्त नहीं करेंगे। सरकार को तुरंत प्रभाव से संसद में पेपर लीक विरोधी कड़ा कानून लाना चाहिए ताकि कोई भी युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।”
पीड़ित परिवारों को मुआवजा और न्याय देने की उठी मांग
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने नीट परीक्षा में हुई धांधली से हताश होकर आत्महत्या करने वाले प्रतिभावान छात्रों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। नेताओं ने कहा कि देश में दर्जनों युवाओं की जान जाना महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि प्रशासनिक नाकामी का नतीजा है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मांग की कि पेपर लीक के कारण अवसाद में आकर जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को सरकार तुरंत उचित मुआवजा दे और इस पूरे घटनाक्रम में संवेदनशीलता दिखाए।
“अंतिम सांस तक लड़ेंगे युवाओं के हक की लड़ाई”
सड़क पर डटे कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष सिर्फ एक परीक्षा या कुछ छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था और उसके भविष्य को बचाने की जंग है। नेताओं ने हुंकार भरते हुए कहा कि जब तक नीट धांधली के दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता और पीड़ित छात्रों को इंसाफ नहीं मिलता, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। कार्यकर्ताओं ने कसम खाई कि छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए वे अपनी अंतिम सांस तक सड़क से लेकर संसद तक लड़ाई लड़ते रहेंगे।
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