Haryana News: डिजिटल अश्लीलता पर कड़े कानून की तैयारी, महिला सशक्तिकरण समिति ने अपनाया कड़ा रुख
गीता भुक्कल की सरकार से मांग: छात्र आंदोलनों के दौरान दर्ज सभी मुकदमे तुरंत वापस ले सरकार
Haryana News: सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर परोसी जा रही अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री को लेकर हरियाणा विधानसभा की महिला सशक्तिकरण समिति ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। पंचकूला में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान समिति की चेयरपर्सन एवं भाजपा विधायक शक्ति रानी शर्मा ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर जारी इस बेकाबू अश्लीलता पर लगाम कसना अब वक्त की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।
उन्होंने बताया कि समिति इस पूरे विषय पर गहन अध्ययन कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट आगामी विधानसभा सत्र में पटल पर रखेगी, ताकि सरकार इस पर कोई प्रभावी और ठोस नीति बना सके।
युवाओं और महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा प्रहार
पंचकूला में पत्रकारों को संबोधित करते हुए चेयरपर्सन शक्ति रानी शर्मा ने कहा कि डिजिटल दुनिया में बिना किसी रोक-टोक के तैर रहा आपत्तिजनक कंटेंट हमारी सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रहा है। इसका सबसे खतरनाक और प्रत्यक्ष दुष्प्रभाव हमारी युवा पीढ़ी और महिलाओं पर पड़ रहा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर अश्लीलता फैलाने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती। इसके लिए न केवल कड़े कानूनों की दरकार है, बल्कि एक मजबूत निगरानी तंत्र (मॉनिटरिंग मैकेनिज्म) की भी सख्त जरूरत है।
दलीय सीमाओं से परे एक सुर, गीता भुक्कल ने भी जताया समर्थन
समिति की वरिष्ठ सदस्य, कांग्रेस विधायक व पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने भी इस संवेदनशील मुद्दे पर पूरी तरह सहमति जताई। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर परोसी जा रही ऐसी सामग्री आज हर परिवार के लिए चिंता का कारण बन चुकी है। इस पर अंकुश लगाने के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर ठोस और कड़े कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी को एक स्वस्थ माहौल दिया जा सके।
महिला थानों और हॉस्टलों का होगा औचक निरीक्षण
महिला सशक्तिकरण समिति केवल कागजी सिफारिशों तक सीमित नहीं रहने वाली। अपने पंचकूला दौरे के दौरान समिति जमीनी हकीकत का आकलन करने के लिए महिला थाना, वन स्टॉप सेंटर (सखी केंद्र) और वर्किंग वुमन हॉस्टलों का निरीक्षण करेगी। इस दौरान वहां मौजूद बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा प्रबंधों और कामकाजी महिलाओं को मिल रही सहूलियतों की समीक्षा की जाएगी।
“छात्रों पर दर्ज मुकदमे हों वापस, संवाद से निकले हल”
पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने छात्र राजनीति और परीक्षाओं से जुड़ा अहम मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने मांग की कि हालिया छात्र आंदोलनों के दौरान विद्यार्थियों पर दर्ज किए गए सभी पुलिस मुकदमों को सरकार बिना किसी देरी के वापस ले।
भुक्कल ने तर्क दिया कि अपनी जायज मांगों के लिए आवाज उठाना विद्यार्थियों का लोकतांत्रिक अधिकार है। सरकार को लाठी या मुकदमों के दम पर उनकी आवाज दबाने के बजाय टेबल टॉक (संवाद) के जरिए समाधान खोजना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक और पारदर्शी सुधार लागू किए जाएं ताकि छात्र हितों की रक्षा हो सके।
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