Odisha Free Education Scheme: ओडिशा में KG से PG तक शिक्षा हुई मुफ्त, मुख्यमंत्री माझी का ऐतिहासिक ऐलान
Odisha Gyanodaya Yojana 2026: पैसों की तंगी से नहीं छूटेगी पढ़ाई, ओडिशा में शुरू हुई केजी से पीजी मुफ्त शिक्षा योजना
Odisha Free Education Scheme : ओडिशा की मोहन चरण माझी सरकार ने राज्य के छात्रों के लिए ‘केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा’ योजना को मंजूरी दे दी है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में पारित इस ऐतिहासिक फैसले के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में पढ़ने वाले करीब 32 लाख छात्रों की एडमिशन फीस पूरी तरह माफ होगी।
ओडिशा में ‘KG से PG तक मुफ्त शिक्षा’ योजना को मंजूरी
ओडिशा सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्र-छात्राओं के भविष्य को आर्थिक संबल देने के लिए एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में किंडरगार्टन (KG) से लेकर पोस्टग्रेजुएट (PG) स्तर तक मुफ्त शिक्षा प्रदान करने की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दे दी गई है। मुख्यमंत्री माझी ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि कैबिनेट ने आधिकारिक तौर पर ‘ज्ञानोदय-शिक्षासु समृद्धि: KG से PG तक मुफ्त शिक्षा’ योजना को हरी झंडी दिखा दी है। इस योजना को राज्य भर में आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पूरी तरह प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा।
सरकारी और सहायता प्राप्त संस्थानों में अब नहीं लगेगी एडमिशन फीस
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस फैसले को देश भर में अपनी तरह की पहली और अनोखी पहल बताया है। इस लोक-कल्याणकारी योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके तहत ओडिशा के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में रेगुलर कोर्स में दाखिला लेने वाले सभी योग्य छात्रों की एडमिशन फीस पूरी तरह से शून्य यानी माफ कर दी जाएगी। सरकार के इस कदम से राज्य के गरीब, मध्यमवर्गीय और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के अभिभावकों को एक बहुत बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी, जिन्हें हर साल दाखिले के समय मोटी रकम का इंतजाम करना पड़ता था।
किन छात्रों को मिलेगा ओडिशा मुफ्त शिक्षा योजना का सीधा लाभ?
ओडिशा सरकार की इस नीति के दायरे में राज्य के लाखों छात्र आ रहे हैं। योजना के नियमों के अनुसार, मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों के विद्यार्थियों को इस मुफ्त शिक्षा का लाभ दिया जाएगा:
सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक के सभी छात्र-छात्राएं।
राज्य के पब्लिक विश्वविद्यालयों, सरकारी कॉलेजों और सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में अंडर-ग्रेजुएट (UG) और पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) प्रोग्राम की पढ़ाई करने वाले रेगुलर छात्र।
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नामांकन दर बढ़ेगी और बीच में पढ़ाई छोड़ने (ड्रॉपआउट) की समस्या होगी खत्म
ओडिशा में अभी तक सरकारी व्यवस्था के तहत केवल कक्षा 8वीं तक की शिक्षा ही मुफ्त दी जा रही थी। अब इस नई योजना की शुरुआत होने के साथ ही मुफ्त शिक्षा प्रदान करने का यह दायरा सीधे पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) स्तर तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री माझी ने स्पष्ट किया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी प्रतिभाशाली छात्र केवल पैसों की तंगी या खराब आर्थिक स्थिति के कारण अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़े। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों का एनरोलमेंट (नामांकन) ग्राफ तेजी से बढ़ेगा और बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में भारी कमी आएगी।
जानिए कौन से संस्थान और कोर्स इस मुफ्त शिक्षा योजना से बाहर हैं?
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह योजना केवल नियमित यानी रेगुलर कोर्स में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए ही मान्य होगी। इस योजना के दायरे में सेल्फ-फाइनेंसिंग कोर्स या सेल्फ-फाइनेंसिंग संस्थान, बिना सरकारी मदद वाले प्राइवेट (अन-एडेड) संस्थान, पीपीपी (PPP) मोड पर संचालित होने वाले संस्थान और किसी भी प्रकार के प्रोफेशनल व टेक्निकल कोर्स को शामिल नहीं किया गया है। इन श्रेणियों में पढ़ने वाले छात्रों को सामान्य नियमों के तहत ही अपनी फीस का भुगतान करना होगा।
5 साल में खर्च होंगे 5,467 करोड़ रुपये, 32 लाख छात्रों का संवरेगा भविष्य
इस दूरगामी योजना को धरातल पर सुचारू रूप से उतारने के लिए ओडिशा सरकार बड़े पैमाने पर बजट का निवेश करने जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के अनुसार, कैबिनेट ने इस स्कीम को चलाने के लिए पहले साल के बजट के रूप में 895.57 करोड़ रुपये की राशि तय की है। वहीं, अगले पांच सालों की कुल अवधि के लिए 5,467.55 करोड़ रुपये के अनुमानित भारी-भरकम बजट को प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। इस बड़े फैसले से स्कूल, मास एजुकेशन और हायर एजुकेशन विभागों के अंतर्गत आने वाले सभी शिक्षण संस्थानों के लगभग 32 लाख छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में सीधी सरकारी मदद मिलेगी।
