Narnaul BLO Suspended: चुनाव ड्यूटी में कामचोरी पड़ी भारी, नारनौल उपायुक्त ने बीएलओ संदीप को किया सस्पेंड
नारनौल उपायुक्त ने बीएलओ संदीप को किया सस्पेंड
Narnaul BLO Suspended (सोनल यादव) भारत निर्वाचन आयोग के सख्त दिशा-निर्देशों के बीच चुनाव और मतदाता सूची से जुड़े कामों में किसी भी स्तर पर लापरवाही अब भारी पड़ने लगी है। नारनौल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) अभियान में काम चोरी और अनुशासनहीनता दिखाने पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त ने नारनौल विधानसभा क्षेत्र के पार्ट नंबर-70 पर तैनात बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) संदीप को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। प्रशासन के इस कड़े कदम से सरकारी महकमों में हड़कंप मच गया है।
एसडीएम की रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई, समझाने-बुझाने का भी नहीं हुआ था असर
दरअसल, इस पूरी कार्रवाई की जमीन नारनौल के एसडीएम अनिरुद्ध यादव की उस जांच रिपोर्ट से तैयार हुई, जो उन्होंने 30 जून 2026 को जिला मुख्यालय भेजी थी। एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में साफ लफ्जों में लिखा था कि बीएलओ संदीप को जो महत्वपूर्ण टास्क सौंपे गए थे, उनमें उन्होंने रत्ती भर भी रुचि नहीं दिखाई।
निलंबन आदेश के मुताबिक, ऐसा नहीं है कि कर्मचारी को सुधरने का मौका नहीं दिया गया। संबंधित बीएलओ की कई बार काउंसिलिंग की गई, वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें बुलाकर जरूरी दिशा-निर्देश दिए और काम की रफ्तार बढ़ाने की हिदायत दी। मगर, इन तमाम कोशिशों के बावजूद संदीप के रवैये में कोई सुधार नहीं आया। इसे वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की खुली अवहेलना और घोर कर्तव्यहीनता मानते हुए यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है, क्योंकि इससे मतदाता सूची जैसी निष्पक्ष और विश्वसनीय प्रक्रिया खटाई में पड़ सकती थी।
विभागीय जांच शुरू, जरूरत पड़ने पर दर्ज होगी क्रिमिनल एफआईआर
जिला निर्वाचन अधिकारी ने भारत निर्वाचन आयोग के पुराने निर्देशों का हवाला देते हुए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियमों के तहत इस निलंबन को अमलीजामा पहनाया है। बात सिर्फ सस्पेंशन तक ही महदूद नहीं रहने वाली; सक्षम अनुशासनिक प्राधिकारी को आरोपी कर्मचारी के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश भी भेज दी गई है।
प्रशासनिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, इस मामले में एफआईआर की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता। आदेश में साफ किया गया है कि यदि विभागीय जांच के दौरान किसी भी तरह के आपराधिक कदाचार या सोची-समझी साजिश के सबूत मिलते हैं, तो मुख्य निर्वाचन अधिकारी (हरियाणा) की मंजूरी लेकर आरोपी के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। फिलहाल, नारनौल के उपमंडल अधिकारी (नागरिक) को इस आदेश की पालना सुनिश्चित करने और इसकी विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट जल्द से जल्द जिला सचिवालय और वहां से भारत निर्वाचन आयोग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
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