July 2, 2026

Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी में भक्तों को क्यों मारी जाती है ‘बेंत’? जानिए धार्मिक मान्यता

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Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी में भक्तों को क्यों मारी जाती है ‘बेंत’? जानिए धार्मिक मान्यता

Jagannath Temple Tradition: रथयात्रा के दौरान क्यों खास मानी जाती है बेंत?

Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी के भगवान जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा के दौरान एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है, जो पहली बार सुनने वालों को चौंका सकती है। यहां दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को पुजारी ‘बेंत’ का स्पर्श कराते हैं, जिसे मंदिर की परंपरा में विशेष प्रसाद माना जाता है।

ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में गिना जाता है। चार धामों में शामिल इस धाम में हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकाली जाती है। इस धार्मिक आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। रथयात्रा के दौरान भगवान के दर्शन के साथ मंदिर की कई सदियों पुरानी परंपराएं भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहती हैं।

इन्हीं परंपराओं में एक ऐसी भी है, जिसके बारे में जानकर कई लोग हैरान रह जाते हैं। मंदिर में दर्शन के दौरान कुछ श्रद्धालुओं को पुजारी ‘बेंत’ का स्पर्श कराते हैं। धार्मिक मान्यता में इसे भगवान जगन्नाथ का विशेष प्रसाद माना जाता है।

भक्तों को ‘बेंत’ का स्पर्श क्यों कराया जाता है?

मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यता के अनुसार इस परंपरा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल से माना जाता है। कहा जाता है कि बाल स्वरूप में श्रीकृष्ण अत्यंत चंचल और नटखट थे। उनकी शरारतों पर माता यशोदा उन्हें डांटती थीं और कभी-कभी बेंत से भी अनुशासित करती थीं।

इसी मान्यता के आधार पर भगवान जगन्नाथ मंदिर में बेंत को विशेष महत्व दिया गया है। मंदिर में भगवान के समीप रखी जाने वाली बेंत को श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद स्वरूप माना जाता है और पुजारी इसी बेंत का स्पर्श कराते हैं।

बेंत से जुड़ी धार्मिक मान्यता क्या है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस श्रद्धालु को यह बेंत स्पर्श करती है, उसके जीवन के पाप नष्ट होते हैं और उसे सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। कई श्रद्धालु इसे भगवान की कृपा और आशीर्वाद का प्रतीक मानते हैं।

यह उल्लेखनीय है कि ये मान्यताएं धार्मिक आस्था पर आधारित हैं। इनके समर्थन में कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन वर्षों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस परंपरा को श्रद्धा के साथ निभाते आ रहे हैं।

जग मार्ग ये भी पढ़ें- Jagannath Rath Yatra 2026: बिना लोहे की कील के कैसे बनते हैं भगवान जगन्नाथ के रथ?

किस लकड़ी से बनाई जाती है यह बेंत?

परंपरा के अनुसार मंदिर में उपयोग की जाने वाली बेंत नारियल की लकड़ी से तैयार की जाती है। इसे सामान्य वस्तु नहीं, बल्कि भगवान जगन्नाथ से जुड़ा पवित्र प्रतीक माना जाता है।

कई श्रद्धालु पुरी से ऐसी बेंत अपने साथ भी लेकर आते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार घर के मंदिर में इसे सम्मानपूर्वक रखने और पूजा के बाद परिवार के सदस्यों को इसका स्पर्श कराने से सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

रथयात्रा में रस्सी खींचने को लेकर क्या मान्यता है?

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु रथों की रस्सी खींचने का प्रयास करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस सेवा में भाग लेने से भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त होता है और व्यक्ति के जीवन में शुभ फल मिलते हैं।

इसी आस्था के कारण हर वर्ष देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं और रथयात्रा का हिस्सा बनते हैं। यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।

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