Kurukshetra LNJP Hospital Case: कुरुक्षेत्र सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह की री-एम्प्लॉयमेंट रद्द, रेप कांड के बाद बड़ी कार्रवाई
कुरुक्षेत्र सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह की री-एम्प्लॉयमेंट रद्द
Kurukshetra LNJP Hospital Case: हरियाणा के स्वास्थ्य महकमे में इन दिनों जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। सरकार ने कुरुक्षेत्र के जिला सिविल सर्जन का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशक (DHS) डॉ. सुखबीर सिंह को बड़ा झटका देते हुए उनकी पुनर्नियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा के हस्ताक्षर वाले आदेश 3 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ से जारी किए गए। हालांकि आदेश में सेवा समाप्ति की कोई ठोस वजह स्पष्ट नहीं की गई है, लेकिन सचिवालय के गलियारों में चर्चा है कि कुरुक्षेत्र के सरकारी अस्पताल में हुए शर्मनाक कांड की जवाबदेही तय करते हुए यह कड़ा एक्शन लिया गया है।
एक साल के लिए मिला था सेवा विस्तार, 7 महीने पहले ही विदाई
रिकॉर्ड के अनुसार, डॉ. सुखबीर सिंह इसी साल 28 फरवरी 2026 को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक के पद से रिटायर हुए थे। उनकी वरिष्ठता को देखते हुए राज्य सरकार ने 2 मार्च को एक विशेष आदेश जारी कर उन्हें 1 मार्च 2026 से 28 फरवरी 2027 तक यानी एक साल के लिए संविदा के आधार पर दोबारा रख लिया था। लेकिन इस कार्यकाल के महज पांच महीने बीतते-बीतते सरकार ने लागू नियमों और शर्तों का हवाला देकर उन्हें असमय कार्यमुक्त कर दिया।
अस्पताल के ओपीडी रूम में नाबालिग से ज्यादती का मामला
इस समूची कार्रवाई की पृष्ठभूमि कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश (LNJP) सिविल अस्पताल में घटी उस घिनौनी वारदात से जुड़ी है, जिसने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया था। अस्पताल के ओपीडी कमरा नंबर 426 में तैनात कंसल्टेंट डॉक्टर शैलेंद्र कुमार शैली पर एक 16 साल की नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने का संगीन आरोप लगा था।
चूंकि डॉ. सुखबीर सिंह के पास जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) का जिम्मा था, इसलिए अस्पताल परिसर के भीतर इतनी बड़ी वारदात होने और प्रशासनिक लापरवाही बरतने के आरोप उन पर भी लग रहे थे। इसी कांड के बाद से ही उन पर गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा था।
आरोपी डॉक्टर की पेंशन पर चली कैंची, भत्तों समेत मिलेंगे सिर्फ 15 हजार
स्वास्थ्य विभाग इस मामले में अब तक की सबसे आक्रामक और अभूतपूर्व कार्रवाई कर चुका है। विभाग ने मुख्य आरोपी कंसल्टेंट डॉक्टर शैलेंद्र कुमार शैली की री-एम्प्लॉयमेंट तो पहले ही खत्म की थी, अब उसकी बुढ़ापे की लाठी यानी पेंशन पर भी ऐतिहासिक सर्जिकल स्ट्राइक की है। डॉ. शैली की 1.15 लाख रुपये की मासिक पेंशन को घटाकर न्यूनतम स्तर यानी महज 9,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। अब तमाम सरकारी भत्ते मिलाकर भी आरोपी डॉक्टर को सिर्फ 15 हजार रुपये मासिक ही मिल पाएंगे।
विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि हरियाणा स्वास्थ्य सेवा के इतिहास में किसी राजपत्रित अधिकारी के खिलाफ ऐसी दंडात्मक कार्रवाई पहले कभी नहीं देखी गई। इस बीच, चर्चाएं यह भी हैं कि इस रैकेट और लापरवाही की जद में आने वाले कुछ अन्य कंसल्टेंट डॉक्टरों की नियुक्तियां भी आने वाले दिनों में रद्द की जा सकती हैं। पूरे घटनाक्रम और अपनी बर्खास्तगी पर पक्ष जानने के लिए जब डॉ. सुखबीर सिंह से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
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