Haryana monsoon: हरियाणा में 4 दिन बाद मानसून की वापसी, करनाल में सबसे ज्यादा 75.8 मिमी बरसे बादल
हरियाणा में एक्टिव हुआ मानसून, गुरुग्राम, फरीदाबाद में झमाझम बारिश
Haryana monsoon: उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में सुस्त पड़ा मानसून आखिरकार हरियाणा में फिर से जोर पकड़ चुका है। पिछले चार दिनों से उमस और भीषण गर्मी झेल रहे प्रदेशवासियों को बुधवार सुबह राहत मिली, जब गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत और सोनीपत समेत एनसीआर के कई इलाकों में बादलों ने डेरा डाला और रुक-रुककर तेज बारिश का दौर शुरू हो गया। इस बारिश ने जहां एक तरफ मौसम सुहाना कर दिया और लोग अरावली की पहाड़ियों में लेपर्ड ट्रेल पर मौसम का लुत्फ उठाते नजर आए, वहीं दूसरी तरफ साइबर सिटी गुरुग्राम की रफ्तार पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है। हालात को देखते हुए गुरुग्राम पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सभी कॉर्पोरेट कंपनियों और निजी संस्थानों को एडवाइजरी जारी की है कि वे जलभराव और ट्रैफिक जाम से बचने के लिए अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम (घर से काम करने) की इजाजत दें।
हाईवे धंसने से लगा 10 किलोमीटर लंबा जाम, हादसों में एक की मौत
मौसम की इस पहली जोरदार दस्तक ने सरकारी दावों और इंफ्रास्ट्रक्चर की पोल खोलकर रख दी है। दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे-48 पर नरसिंहपुर के पास सड़क का एक बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया। इसके चलते हाईवे पर करीब 10 किलोमीटर लंबा भयंकर जाम लग गया, जिसमें गाड़ियां रात दो बजे तक रेंगती नजर आईं। इसी इलाके में सर्विस लेन के पास बने एक गहरे नाले में बच्चों से भरी स्कूल बस भी फंस गई, जिसे क्रेन की मदद से सुरक्षित निकाला गया। उधर, सोनीपत के जीटी रोड पर फुट ओवरब्रिज बनाने के लिए ठेकेदार ने 15 फीट गहरा गड्ढा खोद रखा था, जिसमें बारिश का पानी ओवरफ्लो हो गया। इस पानी से लबालब गड्ढे में डूबने से एक अज्ञात युवक की दर्दनाक मौत हो गई। बहादुरगढ़ के सांखौल गांव में भी जलभराव के बीच बिजली के खंभे से करंट दौड़ गया, जिसकी चपेट में आने से दो दुधारू भैंसों की मौके पर ही मौत हो गई। करंट के खौफ से ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए छतों पर चढ़ने को मजबूर हो गए।
मौसम का गणित: सामान्य से अब भी पीछे है बरसात, सिरसा सबसे गर्म
चंडीगढ़ मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की यह सक्रियता अभी शुरुआती है और अगले 48 से 72 घंटों के भीतर यह पूरे हरियाणा और पंजाब को अपनी जद में ले लेगा। बुधवार को हुई बारिश से सूबे के न्यूनतम तापमान में करीब 2.4 डिग्री सेल्सियस की बड़ी गिरावट आई है, जिसमें सबसे कम तापमान गुरुग्राम में महज 17.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हालांकि, पश्चिमी हरियाणा के सिरसा जिले में अभी भी बादलों की बेरुखी है, जहां 40.8 डिग्री सेल्सियस के साथ पारा सबसे ऊपर रहा। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो 1 जून से 7 जुलाई की अवधि में हरियाणा के भीतर कुल 58.4 मिमी बारिश ही हुई है, जो इस सीजन की सामान्य बारिश के मुकाबले अभी भी 26 फीसदी कम है। बीते मंगलवार को प्रदेश में सबसे ज्यादा बारिश करनाल जिले में रिकॉर्ड की गई, जहां 75.8 मिमी पानी बरसा।
खेती-किसानी पर असर: धान उत्पादकों को हरी झंडी, कपास वाले रखें ध्यान
इस बारिश को देखते हुए कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले तीन-चार दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा, जो धान की रोपाई के लिए बेहद मुफीद है। किसान भाई रोपाई का काम बिना रुके जारी रखें, लेकिन ध्यान रहे कि पौधों को मिट्टी में ज्यादा गहराई पर न दबाएं। फंगस से बचाव के लिए धान की नर्सरी में प्रति वर्ग मीटर एक ग्राम कार्बेन्डाजिम को सूखी रेत में मिलाकर छिड़कने की सलाह दी गई है। इसके उलट, कपास (नरमा) की फसल लगाने वाले किसानों को सचेत किया गया है कि वे खेतों में पानी बिल्कुल न रुकने दें, क्योंकि जलभराव से पौधों की जड़ें गल सकती हैं। बाजरा और ग्वार की बुवाई करने वाले किसानों को फिलहाल मौसम पूरी तरह साफ होने तक रुकने को कहा गया है।
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