Haryana School Blacklisted: हरियाणा में 1107 प्राइवेट स्कूलों पर गिरी गाज, सीएम के आदेश पर दाखिले की पावर छिनी, लगेंगे ताले
कागजात दिखाने में फेल हुए 1107 स्कूल ब्लैकलिस्ट, मुख्यमंत्री ने दिए सीधे बंद करने के आदेश
Haryana School Blacklisted: हरियाणा में नियमों को ताक पर रखकर दुकान की तरह चलाए जा रहे निजी शिक्षण संस्थानों के खिलाफ प्रदेश सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई की है।
शिक्षा निदेशालय की बार-बार की पैनी चेतावनियों और समय-सीमा को नजरअंदाज करने का नतीजा यह हुआ कि राज्य के 22 जिलों में फैले 1107 निजी स्कूलों पर आखिरकार गाज गिर ही गई। मुख्यमंत्री के सीधे हस्तक्षेप और कड़े आदेशों के बाद विभाग ने इन सभी डिफाल्टर स्कूलों को ब्लैकलिस्टेड घोषित कर दिया है। इसके साथ ही, इन स्कूलों के नए शैक्षणिक सत्र में दाखिले करने के अधिकार पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
कागजों की बाजीगरी पड़ी भारी, आरटीई (RTE) नियमों का उड़ाया था मखौल
इस औचक और बड़ी कार्रवाई के पीछे स्कूलों की घोर प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। दरअसल, शिक्षा निदेशालय काफी समय से इन स्कूलों से मान्यता (Recognition) से संबंधित प्रामाणिक दस्तावेज और एनओसी की मांग कर रहा था।
इसके अलावा, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत गरीब बच्चों के दाखिले और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े अनिवार्य नियमों का पालन करने में भी ये स्कूल लगातार आनाकानी कर रहे थे। विभाग द्वारा कई बार नोटिस जारी कर सुधरने का मौका दिया गया, लेकिन जब स्कूल प्रबंधनों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी, तो मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर इन अवैध ठिकानों पर ताला जड़ने का कठोर फरमान सुना दिया।
कैथल में सबसे बड़ा एक्शन, शिक्षा मंत्री के गृह जिले की भी खुली पोल
विभाग द्वारा जारी आधिकारिक रिपोर्ट के आंकड़ों को देखें तो इस कार्रवाई ने पूरे प्रदेश के शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है। कार्रवाई की सबसे बड़ी गाज कैथल जिले पर गिरी है, जहां एक साथ रिकॉर्ड 162 निजी स्कूलों को अवैध पाते हुए बंद करने के आदेश दिए गए हैं। वहीं, हाईटेक और आधुनिकता का दम भरने वाली साइबर सिटी गुरुग्राम की स्थिति भी कोई बहुत अच्छी नहीं रही; यहां 99 स्कूलों को डिफाल्टर पाया गया।
इसके अलावा हिसार में 98 निजी स्कूलों की मान्यता के दावों की हवा निकल गई। सबसे ज्यादा चौंकाने वाले आंकड़े पानीपत से आए हैं, जो मौजूदा शिक्षा मंत्री का गृह जिला है; यहां भी नियमों को ठेंगा दिखा रहे 92 अवैध स्कूलों को चिन्हित कर बंद करने की मुहर लग चुकी है।
बच्चों के भविष्य को लेकर असमंजस, विभाग की पैनी नजर
सरकार की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई ने जहां अवैध रूप से चल रही शिक्षा की दुकानों पर लगाम कसी है, वहीं इन स्कूलों में पढ़ रहे हजारों छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों की धड़कनें भी बढ़ा दी हैं।
दाखिले की पावर छिनने और ताला लगने के आदेश के बाद अब बीच सत्र में बच्चों के भविष्य का क्या होगा, इसे लेकर संशय बरकरार है। हालांकि, शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दावा है कि नियमों से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और प्रभावित बच्चों को नजदीकी मान्यता प्राप्त या सरकारी स्कूलों में शिफ्ट करने के विकल्पों पर विचार किया जा सकता है ताकि किसी की पढ़ाई का नुकसान न हो।
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