July 11, 2026

Gurugram News: गुरुग्राम एनकाउंटर पर उठे सवाल, जेवलिन खिलाड़ी था 17 साल का आर्यन, पिता बोले- टांग में मार देते गोली, छाती क्यों चीरी?

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Gurugram News: गुरुग्राम एनकाउंटर पर उठे सवाल, जेवलिन खिलाड़ी था 17 साल का आर्यन, पिता बोले- टांग में मार देते गोली, छाती क्यों चीरी?

गुरुग्राम एनकाउंटर में मारे गए 3 लोगों के पिता, बोले- टांग में मार देते गोली, छाती क्यों चीरी?

Gurugram News: गुरुग्राम पुलिस की क्राइम ब्रांच के साथ हुई मुठभेड़ में भालोट गांव के तीन सगे दोस्तों की मौत की खबर जैसे ही शुक्रवार सुबह गांव पहुंची, पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि घर से आम लड़कों की तरह निकले बच्चे चंद घंटों में पुलिस रिकॉर्ड में ‘शार्प शूटर’ बन गए।

अंकित के पिता अनिल, जो अमूल प्लांट में मजदूरी करते हैं, ने बताया कि उनका बेटा आठवीं फेल था और कभी-कभार दिहाड़ी कर लेता था। दो दिन पहले वह परिवार से हरिद्वार जाकर कांवड़ लाने की बात कहकर निकला था। वहीं, १०वीं क्लास का छात्र नितिन अपने दोस्त आर्यन के साथ मोटरसाइकिल ठीक कराने के बहाने घर से निकला था और उसके बाद से दोनों का फोन बंद आ रहा था।

“छाती में क्यों मारी गोली, टांग में भी तो मार सकते थे”— जेवलिन खिलाड़ी आर्यन के पिता का दर्द

एनकाउंटर की इस थ्योरी पर सबसे तीखा और भावुक सवाल आर्यन के पिता प्रदीप फोगाट ने उठाया है। प्रदीप के मुताबिक, उनका १७ साल का बेटा आर्यन कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ जेवलिन थ्रो (भाला फेंक) खिलाड़ी था। वह पिछले दो साल से मैदान पर पसीना बहा रहा था और 12वीं क्लास की पढ़ाई के साथ-साथ 55 से 60 मीटर तक भाला फेंकने लगा था। प्रदीप ने रोते हुए कहा, “मेरा बच्चा नादान था, वह बहकावे में आ गया होगा।

लेकिन पुलिस को उसे एक मौका तो देना चाहिए था। अगर कार्रवाई ही करनी थी, तो गोली टांग में मारी जा सकती थी, सीधे छाती को निशाना क्यों बनाया गया?” प्रदीप ने बताया कि वे दो दिन से पुलिस थाने के चक्कर काट रहे थे, लेकिन पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखने के बजाय यह कहकर टाल दिया कि कहीं घूमने गया होगा, वापस आ जाएगा।

पुलिस की संवेदनहीनता और पुराने मामलों का साया

नितिन के पिता संजय, जो खुद एक टूरिस्ट गाड़ी चलाकर अपने परिवार का पेट पालते हैं, उन्होंने पुलिसिया रवैए पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। संजय ने बताया कि जब उनका बेटा लापता हुआ और वे थाने पहुंचे, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने ढाढ़स बंधाने के बजाय बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा, “हम किस-किस को ढूंढकर लाएं? आपकी गलती यह है कि आपने इन्हें पैदा किया है।

” संजय ने यह भी खुलासा किया कि कुछ समय पहले भी पुलिस ने नितिन को एक मुठभेड़ के मामले में जबरन घसीटा था और उस पर सरकारी गवाह बनने का दबाव डाला जा रहा था, जिसके लिए परिवार तैयार नहीं था। उसी डर और दबाव के चलते नितिन दिल्ली बाईपास के एक होटल में कुछ गलत तत्वों के संपर्क में आ गया था।

गैंगस्टरों का सिंडिकेट और मासूमों का शिकार; परिवारों की न्याय की गुहार

मृतकों के परिवारों का साफ कहना है कि वे न तो लंदन में बैठे कुख्यात गैंगस्टर दीपक नांदल को जानते हैं और न ही किसी अन्य अपराधी को। फतेहाबाद के रहने वाले संदीप उर्फ दीपा का तो पुराना आपराधिक रिकॉर्ड (14 मुकदमे) था, लेकिन इन तीनों लड़कों का पहले से कोई बड़ा क्राइम बैकग्राउंड नहीं था।

आर्यन के पिता ने कहा कि बड़े गैंगस्टर सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से ऐसे कम उम्र के और नादान बच्चों को किसी न किसी चीज का लालच देकर या डरा-धमकाकर अपने जाल में फंसा लेते हैं। ये गैंगस्टर राजनीतिक रूप से रसूखदार होते हैं और इन्हें इन गरीब बच्चों की जिंदगी से कोई लेना-देना नहीं होता। पीड़ितों के परिवारों ने मांग की है कि असली न्याय तब होगा जब पुलिस इन बच्चों की लाशें गिराने के बजाय सात समंदर पार बैठे उन मुख्य सरगनाओं को दबोचेगी, जो हरियाणा के गांवों से युवाओं का भविष्य तबाह कर रहे हैं।

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