July 23, 2026

Bhiwani News: भिवानी में अग्रवाल समाज का बड़ा फैसला, शादियों में मिठाई के डिब्बों पर रोक, मिलनी तय हुई ₹100

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Bhiwani News: भिवानी में अग्रवाल समाज का बड़ा फैसला: शादियों में मिठाई के डिब्बों पर रोक, मिलनी तय हुई ₹100

शादी में फिजूलखर्ची रोकने भिवानी अग्रवाल समाज की पहल, तिलक और रस्मों का खर्च हुआ सीमित

Bhiwani News: शादी-ब्याह के नाम पर लगातार बढ़ रहे दिखावे और आर्थिक बोझ को दूर करने के लिए हरियाणा के भिवानी में अग्रवाल समाज ने एक बेहद प्रगतिशील फैसला लिया है।

शहर की कमला भवन धर्मशाला में अग्रसेन मैरिज सेल के बैनर तले आयोजित समाज की एक अहम बैठक में सर्वसम्मति से तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में लिए गए इन फैसलों का उद्देश्य वैवाहिक आयोजनों को सादगीपूर्ण और सुलभ बनाना है।

बैठक में उपस्थित समाज के प्रबुद्धजनों ने एक स्वर में माना कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में शादियों का बजट आम परिवारों के बजट से बाहर होता जा रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए रस्मों के नाम पर होने वाले बेवजह के खर्चों पर तुरंत प्रभाव से अंकुश लगाना बेहद जरूरी हो गया था।

मिठाई के डिब्बों पर पाबंदी और मिलनी की राशि ₹100 तय

बैठक में पारित प्रस्तावों के तहत अब बेटी की शादी में मिठाई के महंगे डिब्बे बांटने या लेने की प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके साथ ही, लड़के पक्ष की शादी में शगुन के नाम पर होने वाले लेन-देन की परंपरा को भी समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।

अक्सर देखा जाता है कि मिलनी की रस्म के दौरान लाखों रुपये का लेन-देन होता है, जिससे समाज का गरीब और मध्यम वर्ग दबाव महसूस करता है। इस पर रोक लगाते हुए अग्रवाल समाज ने मिलनी की अधिकतम सीमा केवल ₹100 निर्धारित कर दी है। इसके अलावा तिलक, पुरोजन और अन्य पारंपरिक रस्मों पर होने वाले अनावश्यक खर्चों को भी कड़ाई से सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं।

मध्यमवर्गीय परिवारों को मिलेगी बड़ी राहत, समाज में जगी नई उम्मीद

अग्रवाल समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह निर्णय किसी एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज के हित को ध्यान में रखकर लिया गया है। इस पहल से न केवल बेटियों के मां-बाप को आर्थिक मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी, बल्कि शादियों में सादगी और पारिवारिक सौहार्द का माहौल भी कायम होगा।

भिवानी से शुरू हुई इस सामाजिक सुधार की बयार की अब पूरे प्रदेश में तारीफ हो रही है। समाज के लोगों को उम्मीद है कि अन्य वर्ग और संगठन भी इस तरह के फैसले लेकर समाज को फिजूलखर्ची की दलदल से बाहर निकालने में अपनी भूमिका निभाएंगे।

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