July 28, 2026

Bhiwani News: भिवानी में गो सम्मान यात्रा, ज्ञापन लेने नहीं पहुंचे अधिकारी, तो लघु सचिवालय के गेट पर शुरू हुआ हनुमान चालीसा

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Bhiwani News: भिवानी में गो सम्मान यात्रा, ज्ञापन लेने नहीं पहुंचे अधिकारी, तो लघु सचिवालय के गेट पर शुरू हुआ हनुमान चालीसा

भिवानी में प्रशासनिक अनदेखी पर भड़के गोभक्त, सचिवालय के बाहर बैठकर किया हनुमान चालीसा का पाठ

Bhiwani News: भिवानी शहर में सोमवार को उस वक्त प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया, जब गो सम्मान अभियान के तहत पहुंचे सैकड़ों साधु-संतों और शहरवासियों ने लघु सचिवालय के मुख्य द्वार पर ही डेरा डाल दिया। गोहत्या पर देशव्यापी रोक लगाने और गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर निकाली जा रही यह यात्रा जब सचिवालय पहुंची, तो ज्ञापन लेने के लिए कोई भी बड़ा अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था।

अधिकारियों की इस बेरुखी से नाराज यात्रा में शामिल लोग और साधु-संत वहीं जमीन पर बैठ गए। देखते ही देखते सचिवालय परिसर के बाहर हनुमान चालीसा का सस्वर पाठ शुरू हो गया, जिससे पूरा इलाका गूंज उठा।

प्रेक्षा विहार से शुरू हुई यात्रा, नंदी ने संभाली अगुवाई

कार्यक्रम के तहत सोमवार सुबह भिवानी के प्रेक्षा विहार में विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों के लोग और साधु-संत एकत्र हुए। यहां से गो सम्मान अभियान यात्रा की शुरुआत हुई। इस यात्रा की सबसे खास बात यह रही कि इसका नेतृत्व एक नंदी (बैल) कर रहा था, जिसके पीछे विशाल गोवंश और श्रद्धालुओं का जत्था चल रहा था।

यह यात्रा शहर के प्रमुख व्यावसायिक और व्यस्त इलाकों—घंटाघर, हांसी गेट और पुराना बस स्टैंड से होती हुई अनुशासित तरीके से लघु सचिवालय की ओर बढ़ी। यात्रा के दौरान पूरे रास्ते गो संवर्धन और सुरक्षा को लेकर गगनभेदी नारे गूंजते रहे।

देरी से पहुंचे अधिकारी, फिर सौंपा राष्ट्रपति व पीएम के नाम ज्ञापन

जैसे ही यात्रा लघु सचिवालय के पास पहुंची, वहां प्रशासनिक अधिकारियों की गैरमौजूदगी देखकर लोगों का पारा चढ़ गया। काफी देर इंतजार करने के बाद जब कोई जिम्मेदार अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं आया, तो प्रदर्शनकारियों ने सचिवालय के गेट का घेराव कर लिया और वहीं बैठकर भक्ति भाव के साथ हनुमान चालीसा पढ़ने लगे।

माहौल गरमाता देख आनन-फानन में प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम एक विस्तृत हस्ताक्षरित ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा। संतों ने स्पष्ट किया कि यदि गायों के संरक्षण को लेकर सरकार जल्द कड़े कदम नहीं उठाती, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।

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