Chandigarh Building Collapse: 2 दिन की बारिश ने ढहाया जर्जर लेंटर, मलबे से जिंदा निकले शख्स ने बताया खौफनाक मंजर
चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया में 54 साल पुरानी बिल्डिंग गिरी, मेरठ के दो व्यापारियों की मौत, 5 बचाए गए
Chandigarh Building Collapse: चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 में शनिवार की शाम उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब प्लॉट नंबर 28/9 में बनी एक बेहद पुरानी दो मंजिला इमारत अचानक जमींदोज हो गई। मलबे के भारी-भरकम ढेर के नीचे करीब सात लोग दब गए, जिनमें से दो की दम घुटने और गंभीर चोटों के कारण मौत हो गई। मृतकों की शिनाख्त उत्तर प्रदेश के मेरठ निवासी तरुण जैन (45) और तरुण कौशिक (48) के रूप में हुई है।
वहीं, मलबे में फंसे पांच अन्य लोगों कुलदीप सिंह, कुलबीर सिंह, उमेश, राहुल और अजीत को बचावकर्मियों ने सूझबूझ से जिंदा बाहर निकाल लिया, जिनका फिलहाल इलाज जारी है।
“भूकंप जैसा झटका लगा और सब खत्म हो गया” – चश्मदीदों का आंखों देखा हाल
मलबे से सुरक्षित निकले रमेश कुमार ने रोंगटे खड़े कर देने वाली आपबीती बयां की। रमेश ने बताया कि शाम के करीब 4:20 बजे अचानक ऐसा लगा जैसे कोई तेज भूकंप आया हो। पूरी इमारत में एक जोरदार झटका लगा और पलक झपकते ही छत और दीवारें ढह गईं। हादसे के फौरन बाद मौके पर पुलिस और जेसीबी बुलाई गई ताकि लेंटर को हटाकर मलबे के नीचे दबे लोगों के लिए ऑक्सीजन का रास्ता बनाया जा सके।
इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एमपीएस चावला ने बताया कि यह कॉमर्शियल बिल्डिंग 1972 की अलॉटमेंट थी। महज 15 दिन पहले ही इसे स्क्रैप (कबाड़) के काम के लिए किराए पर लिया गया था। पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बारिश की सीलन को यह जर्जर ढांचा बर्दाश्त नहीं कर सका।
रेस्क्यू ऑपरेशन में लापरवाही? ढाई घंटे बाद दी गई NDRF को सूचना
इस पूरे हादसे के दौरान प्रशासनिक तालमेल की एक बड़ी कमी भी उजागर हुई है। जब हादसा शाम 4:20 बजे हुआ, तो सिविल डिफेंस और लोकल पुलिस तुरंत पहुंच गई थी, लेकिन सबसे एक्सपर्ट एजेंसी एनडीआरएफ को पूरे ढाई घंटे बाद यानी पौने सात बजे इन्फॉर्म किया गया।
एनडीआरएफ के अधिकारी संजीव कोहली ने बताया कि सूचना मिलते ही उनकी टीम ने कमान संभाली और लेंटर को कटर की मदद से काटकर नीचे दबे आखिरी दो लोगों तक पहुंचे। करीब साढ़े पांच घंटे तक चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन में सेना के जवानों ने भी मोर्चा संभाला था।
मेयर ने साधी चुप्पी, 48 घंटे में चंडीगढ़ में यह दूसरा बड़ा हादसा
मौके पर पहुंचे चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने शुरुआत में कहा था कि बिल्डिंग में रेनोवेशन का काम चल रहा था और मलबे में फंसे बाकी दो लोग सुरक्षित हैं, हालांकि बाद में दोनों को मृत घोषित कर दिया गया।
जब मेयर से एनडीआरएफ को देरी से बुलाने पर तीखा सवाल किया गया, तो उन्होंने इस पर कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया। बता दें कि मानसून के आते ही चंडीगढ़ में दो दिनों के भीतर यह दूसरा बड़ा हादसा है। इससे पहले 3 जुलाई को सेक्टर-26 स्थित सीसीईटी (CCET) कॉलेज के पुराने मल्टीपर्पज हॉल की छत भी इसी तरह गिर गई थी, लेकिन वह बिल्डिंग खाली होने के कारण बड़ा हादसा टल गया था। फिलहाल, एस्टेट ऑफिस और सीएफएसएल (CFSL) की टीमें मामले की जांच कर रही हैं।
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