Chandigarh Farmers Protest: चंडीगढ़ में किसानों का प्रदर्शन, ट्रेड डील और भूमि पूलिंग नीति के विरोध में मटका चौक तक निकला रोष मार्च
चंडीगढ़ में किसानों का प्रदर्शन
Chandigarh Farmers Protest: चंडीगढ़ में शुक्रवार को संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर पंजाब और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में किसान सेक्टर-34 स्थित प्रदर्शनी ग्राउंड में जुटे। प्रदर्शन की अगुवाई किसान नेता उग्राह ने की। यहां से किसान बसों, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों के काफिले के साथ सेक्टर-17 स्थित मटका चौक तक पहुंचे। रैली के दौरान शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात धीमा रहा और कुछ स्थानों पर जाम जैसी स्थिति देखने को मिली। किसानों का यह प्रदर्शन भारत-अमेरिका के प्रस्तावित ट्रेड समझौते और पंजाब सरकार की नई भूमि पूलिंग नीति के विरोध में आयोजित किया गया। प्रदर्शन के दौरान कई किसान बसों की छतों पर बैठकर भी रैली में शामिल हुए, जिसकी तस्वीरें पूरे प्रदर्शन का प्रमुख दृश्य बनकर सामने आईं।
सेक्टर-34 से मटका चौक तक सीमित रही रैली
चंडीगढ़ प्रशासन ने किसानों को केवल सेक्टर-34 प्रदर्शनी ग्राउंड से सेक्टर-17 स्थित मटका चौक तक मार्च निकालने की अनुमति दी थी। तय कार्यक्रम के अनुसार रैली इसी मार्ग तक सीमित रही। मटका चौक पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारी वापस सेक्टर-34 लौटे, जहां संयुक्त किसान मोर्चा की सभा आयोजित की गई। प्रशासन ने प्रदर्शन के लिए दोपहर 12:30 बजे से 2 बजे तक करीब डेढ़ घंटे का समय निर्धारित किया था।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, कई रूटों पर ट्रैफिक प्रभावित
रैली को देखते हुए सेक्टर-34, मटका चौक और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। मटका चौक पर बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए चंडीगढ़ पुलिस ने कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया। इससे शहर के कुछ प्रमुख रास्तों पर वाहन चालकों को धीमी गति और वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ा।
संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि भारत-अमेरिका के प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते से भारतीय कृषि, डेयरी क्षेत्र और छोटे उद्योगों पर असर पड़ सकता है। किसान संगठनों का आरोप है कि यदि विदेशी कृषि उत्पाद कम कीमत पर भारतीय बाजार में आते हैं तो स्थानीय किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने में कठिनाई हो सकती है। किसान नेताओं ने कहा कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को कृषि संगठनों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए ताकि किसानों के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जा सके।
भूमि पूलिंग नीति पर भी जताया विरोध
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने पंजाब सरकार की नई भूमि पूलिंग नीति का भी विरोध किया। उनका कहना है कि यह नीति किसानों के हितों के अनुरूप नहीं है और इससे कृषि भूमि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि वह दोनों मुद्दों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा और सरकार से किसानों की चिंताओं पर विचार करने की मांग करेगा।
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