Faridabad News: फरीदाबाद में ढाई साल में 3900 वाहन चोरी, 25 करोड़ की गाड़ियां निगल गए चोर; देखें डराने वाले आंकड़े
एनआईटी और डबुआ मंडी में वाहन चोर सक्रिय, पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हुए चौंकाने वाले मामले
Faridabad News: स्मार्ट सिटी कहलाने वाले फरीदाबाद में बुनियादी सुविधाओं का टोटा किस कदर आम शहरी पर भारी पड़ रहा है, इसकी बानगी शहर की बेपटरी पार्किंग व्यवस्था में देखी जा सकती है। फरीदाबाद के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों, रेलवे स्टेशनों और अस्पतालों के आसपास सुरक्षित पार्किंग स्पेस न होना अब महज एक असुविधा नहीं, बल्कि अपराध को खुला निमंत्रण बन गया है।
सुरक्षित ठिकानों की कमी के चलते बेतरतीब खड़े होने वाले वाहन शातिर चोरों के लिए आसान शिकार साबित हो रहे हैं। हालात यह हैं कि खरीदारी करने या दफ्तर जाने वाले लोग जब तक लौटकर नहीं आते, उनका दिल गाड़ी की सुरक्षा को लेकर धक-धक करता रहता है। स्थानीय निवासियों का दर्द यह है कि वे पार्किंग चार्ज देने को तैयार हैं, बशर्ते उनकी गाड़ियां सुरक्षित रहें, लेकिन प्रशासन इस ओर आंखें मूंदे बैठा है।
आंकड़े दे रहे हैं गवाही: हर रोज उड़ रही हैं गाड़ियां, पुलिस फाइलें हुईं भारी
पुलिस के अपने आधिकारिक दस्तावेज फरीदाबाद में वाहन चोरों के बढ़ते सिंडिकेट की गवाही दे रहे हैं। पिछले ढाई वर्षों के भीतर जिले के अलग-अलग थानों में करीब 3900 वाहन चोरी के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। ब्लैक मार्केट के हिसाब से भी आंका जाए, तो चोरी गई इन बाइकों और कारों की अनुमानित कीमत 25 करोड़ रुपये से कहीं अधिक बैठती है।
साल दर साल का ग्राफ देखें तो साल 2024 में यह आंकड़ा 1676 था, जो साल 2025 में मामूली गिरावट के साथ 1554 पर रहा। वहीं, मौजूदा साल 2026 के शुरुआती महीनों में ही अब तक 645 गाड़ियां पार की जा चुकी हैं। ये आंकड़े साफ इशारा करते हैं कि जब तक सड़कों से लावारिस पार्किंग खत्म नहीं होगी, तब तक इन चोरियों पर ब्रेक लगाना नामुमकिन है।
एनआईटी से लेकर डबुआ मंडी तक का बुरा हाल, सिर्फ मेट्रो पार्किंग का सहारा
शहर के सबसे व्यस्ततम व्यापारिक हिस्सों जैसे एनआईटी, ओल्ड फरीदाबाद, डबुआ मंडी, बल्लभगढ़ और सराय ख्वाजा की बात करें, तो यहां रोजाना पैर रखने की जगह नहीं होती। इन बाजारों में सुव्यवस्थित सरकारी या निजी पार्किंग न होने के कारण लोग सड़कों के किनारे ही आड़ी-तिरछी गाड़ियां खड़ी करने को मजबूर हैं।
शहर में केवल मेट्रो स्टेशनों के पास ही चुस्त-दुरुस्त पार्किंग दिखती है। मेट्रो पार्किंग के संचालक भूदेव शर्मा का भी यही मानना है कि जहां सीसीटीवी और बाउंड्री वाली व्यवस्थित पार्किंग होती है, वहां गाड़ियां पूरी तरह महफूज रहती हैं। ऐसी व्यवस्था बाजारों में भी लागू होनी चाहिए। वहीं, स्थानीय नागरिक राम बाबू शर्मा कहते हैं कि जनता को बुनियादी सहूलियतें देना नगर निगम और जिला प्रशासन का प्राथमिक दायित्व है। थोड़ी सी मुस्तैदी और सही प्लानिंग से इस बड़ी मुसीबत से निजात पाई जा सकती है।
अब मल्टीलेवल पार्किंग ही एकमात्र रास्ता, इच्छाशक्ति दिखाए नगर निगम
शहरी विकास के जानकारों और नीति निर्माताओं का मानना है कि फरीदाबाद जिस रफ्तार से फैल रहा है, वहां अब पारंपरिक पार्किंग के भरोसे नहीं रहा जा सकता। बाजारों की संकरी गलियों और बढ़ती गाड़ियों की तादाद को देखते हुए अब आधुनिक और वर्टिकल यानी मल्टीलेवल पार्किंग प्रोजेक्ट्स को धरातल पर उतारना समय की सबसे बड़ी मांग है।
इससे न सिर्फ सड़कों पर लगने वाले कछुआ चाल ट्रैफिक और जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि संगठित तौर पर चल रहे वाहन चोरी के काले धंधे की कमर भी टूटेगी। अब देखना यह है कि आंकड़ों की इस गंभीर चेतावनी के बाद फरीदाबाद नगर निगम और प्रशासनिक अमला कब नींद से जागता है।
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