Pehowa Krishna Kripa Mandir: पिहोवा के श्री कृष्ण कृपा सेवा मंदिर में बंटा 90 परिवारों को राशन, सेवा देख भावुक हुए श्रद्धालु
जियो गीता समिति ने निभाई जिम्मेदारी: पिहोवा में 90 घरों का जलेगा चूल्हा, बांटी गई खाद्य सामग्री
Pehowa Krishna Kripa Mandir: (अभिषेक पूर्णिमा) हरियाणा की धार्मिक नगरी पिहोवा में स्थित श्री कृष्ण कृपा सेवा मंदिर एक बार फिर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों की उम्मीदों का केंद्र बना।
महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के पावन आशीर्वाद और उनकी प्रेरणा से पिछले लगभग 30 वर्षों से चली आ रही परोपकार की परिपाटी को आगे बढ़ाते हुए रविवार को मंदिर परिसर में मासिक राशन वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर कृष्ण कृपा जियो गीता समिति के प्रधान मनोहर लाल शर्मा ने खुद आगे बढ़कर उन परिवारों को सहारा दिया, जिन्हें इस समय मदद की सख्त दरकार है।
आटा, दाल से लेकर मसालों तक की मदद; सेवा में जुटे समिति के प्रबुद्ध चेहरे
इस पुनीत कार्य के दौरान लगभग 90 जरूरतमंद परिवारों को महीने भर की खाद्य सामग्री मुहैया कराई गई, जिसमें मुख्य रूप से आटा, दाल, चावल, नमक और रोजमर्रा के पिसे मसाले शामिल रहे।
मंदिर परिसर में चल रहे इस सेवा कार्य में संवेदना और अपनेपन का माहौल साफ दिखाई दे रहा था। इस अभियान को अमलीजामा पहनाने में जियो गीता समिति के उपप्रधान अनिल धवन, श्री कृष्ण कृपा गौशाला के प्रधान जगदीश तनेजा और वरिष्ठ सदस्य नरेश छाबड़ा ने भी सक्रिय भूमिका निभाई और राशन वितरण की कमान संभाली।
“हमारे दान का इससे श्रेष्ठ सदुपयोग और क्या होगा”— भावुक हुए मंदिर आए श्रद्धालु
इस पूरे आयोजन का सबसे मर्मस्पर्शी और सुंदर दृश्य तब देखने को मिला, जब मंदिर में ठाकुर जी के दर्शन करने और माथा टेकने आए आम श्रद्धालुओं की नजर इस राशन वितरण पर पड़ी।
लाइनों में लगे जरूरतमंद परिवारों के चेहरों पर राहत और संतोष की लकीरें देखकर कई भक्त भावुक हो गए। उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, “हम लोग भगवान के चरणों में जो भी दान-दक्षिणा अर्पित करते हैं, उसका इससे पवित्र और समाजोपयोगी इस्तेमाल नहीं हो सकता। हमारी श्रद्धा जब किसी गरीब के घर का चूल्हा जलाने के काम आती है, तो वही ईश्वर की सच्ची कृपा बन जाती है।”
पूजा-अर्चना के साथ सामाजिक सरोकार का केंद्र बना मंदिर; सनातन संस्कृति को नमन
श्रद्धालुओं ने श्री कृष्ण कृपा परिवार की इस निरंतरता की तारीफ करते हुए कहा कि यह मंदिर अब केवल परंपरागत पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संकट के समय गरीबों की बांह पकड़ने का एक मजबूत जरिया बन चुका है।
वहां मौजूद कई प्रबुद्ध नागरिकों ने इस अभियान को समाज के समृद्ध वर्ग के लिए एक बड़ी सीख बताते हुए भविष्य में भी इस कार्य के लिए तन, मन और धन से हर संभव सहयोग देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के समापन पर सभी सहयोगियों ने स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के विचारों को याद किया और इस बात पर जोर दिया कि निस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही वास्तव में सनातन संस्कृति का असली मूल तत्व है।
