Hathnikund Barrage: शुक्रवार रात 47 हजार क्यूसेक पहुंचने के बाद शनिवार सुबह घटा पानी, हथिनीकुंड बैराज का ताजा अपडेट देखें
हथिनीकुंड बैराज पर नियंत्रित हुआ पानी का बहाव
Hathnikund Barrage: यमुना नदी के ऊपरी पर्वतीय कैचमेंट क्षेत्रों में पिछले दो दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने मैदानी इलाकों में हलचल तेज कर दी है. पहाड़ों से आ रहे अतिरिक्त पानी के कारण हथिनीकुंड बैराज के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर देखा जा रहा है. शुक्रवार की देर रात बैराज पर पानी का बहाव अचानक तेजी से बढ़ते हुए 47 हजार क्यूसेक के स्तर को पार कर गया था.
जो इस मानसूनी सीजन का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. इस अचानक आई तेजी से सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी थीं, लेकिन शनिवार सुबह होते-होते जल बहाव में आई बड़ी कमी ने अधिकारियों को बड़ी राहत दी है.
सुबह 10 बजे का अपडेट: नियंत्रित हुआ पानी का बहाव
बैराज कंट्रोल रूम से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह 10 बजे हथिनीकुंड बैराज पर कुल जल बहाव घटकर 33,079 क्यूसेक दर्ज किया गया है. स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में होने के बाद विभाग ने पानी का बंटवारा शुरू कर दिया है. कुल बहाव में से 20,809 क्यूसेक पानी मुख्य यमुना नदी के जरिए आगे दिल्ली की ओर डायवर्ट किया गया है.
इसके अलावा, कृषि और घरेलू जरूरतों को पूरा करने वाली पश्चिमी यमुना नहर में 12,910 क्यूसेक और पूर्वी यमुना नहर में 260 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. वर्तमान में मुख्य नदी के भीतर लगभग 30 हजार क्यूसेक पानी का प्रवाह बना हुआ है, जो खतरे के निशान से काफी नीचे है.
पहाड़ी कैचमेंट एरिया में आफत की बारिश, मीनस में रिकॉर्ड 87 मिमी पानी बरसा
10 जुलाई तक मौसम विभाग और कंट्रोल रूम को प्राप्त हुए वर्षा आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ है कि पहाड़ों पर मानसूनी बादल जमकर बरस रहे हैं. कैचमेंट एरिया के तहत आने वाले मीनस में सबसे ज्यादा 87.0 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है. इसके अलावा अटल में 74.0 मिमी, त्यूनी में 73.0 मिमी, गंगावाला में 66.8 मिमी और यशवंत नगर में 66.2 मिमी पानी बरसा है.
वहीं पुरोला, पांवटा, हरिपुर और कालसी जैसे इलाकों में भी 50 मिमी से ऊपर की बारिश दर्ज हुई है. पहाड़ों में हो रही इसी व्यापक वर्षा के कारण मैदानी इलाकों की नदियों में कभी भी अचानक पानी बढ़ने का अंदेशा बना रहता है.
स्थिति काबू में, लेकिन 24 घंटे अलर्ट पर हैं फ्लड कंट्रोल के अफसर
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि शुक्रवार आधी रात को जो उफान दिखा था, वह अब शांत हो रहा है. हालांकि, अधिकारी इस राहत को स्थायी नहीं मान रहे हैं. उनका स्पष्ट कहना है कि यदि उत्तराखंड और हिमाचल के ऊपरी कैचमेंट इलाकों में बारिश का यह दौर दोबारा शुरू होता है, तो बैराज पर जल बहाव में एक बार फिर अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो सकती है.
फिलहाल मैदानी भागों में बाढ़ जैसी कोई स्थिति या खतरा नहीं है. इसके बावजूद, एहतियात के तौर पर विभाग के इंजीनियर और तकनीकी स्टाफ चौबीसों घंटे फ्लड मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए पल-पल की रिपोर्ट ले रहे हैं.
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