Himachal News: मंडी में आशा वर्करों का प्रदर्शन, 3,600 रुपये मानदेय और सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
मंडी में आशा वर्करों का प्रदर्शन
Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी में गुरुवार को आशा वर्करों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इसके बाद जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्र और प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजा गया। साथ ही स्वास्थ्य मंत्री के नाम भी मांगपत्र सौंपा गया, जिसमें मानदेय बढ़ाने, सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई। आशा वर्करों का कहना है कि वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें पर्याप्त मानदेय और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने सरकार से जल्द सकारात्मक फैसला लेने की मांग की।
3,600 रुपये मासिक मानदेय की उठाई मांग
आशा यूनियन की प्रधान सुनीता कश्यप ने कहा कि जब तक आशा वर्करों के लिए स्थायी नीति लागू नहीं होती, तब तक उन्हें हर महीने 3,600 रुपये का निश्चित मानदेय दिया जाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में आशा वर्करों को अपने कार्य के अनुरूप आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल रही है। उन्होंने यह भी मांग की कि आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, ताकि उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह सुविधाएं और अधिकार मिल सकें।
पेंशन, ईपीएफ और बीमा सुविधाओं की भी मांग
सुनीता कश्यप ने कहा कि आशा वर्कर वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहली कड़ी के रूप में काम कर रही हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम, टीकाकरण अभियान और विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को सफल बनाने में उनकी अहम भूमिका रहती है। इसके बावजूद उन्हें पेंशन, ईपीएफ, बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से वंचित रखा गया है। उन्होंने इन सभी सुविधाओं को जल्द लागू करने की मांग की।
आयुष्मान कार्ड का पूरा लाभ नहीं मिलने का आरोप
आशा यूनियन का कहना है कि सरकार की ओर से उन्हें आयुष्मान कार्ड तो उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन उनका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस कारण कई आशा वर्करों को स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के समय परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था में सुधार कर आशा वर्करों को योजनाओं का वास्तविक लाभ सुनिश्चित करने की मांग की।
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
आशा यूनियन की प्रधान सुनीता कश्यप ने कहा कि यदि केंद्र और प्रदेश सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आशा वर्कर बड़े स्तर पर सरकार का घेराव करने के लिए भी मजबूर होंगी। उन्होंने सरकार से अपील की कि स्वास्थ्य सेवाओं में आशा वर्करों के योगदान को देखते हुए उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए और जल्द समाधान निकाला जाए।
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