July 10, 2026

IDFC Bank Scam: आईडीएफसी बैंक घोटाले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड के दो अफसर गिरफ्तार

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IDFC Bank Scam: आईडीएफसी बैंक घोटाले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड के दो अफसर गिरफ्तार

चंडीगढ़ सीबीआई दफ्तर में पूछताछ के बाद श्रम विभाग के दो अधिकारी अरेस्ट, जानें पूरा फर्जीवाड़ा

IDFC Bank Scam: हरियाणा के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भूचाल लाने वाले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के तेवर लगातार सख्त होते जा रहे हैं। जांच एजेंसी ने इस मामले की कड़ियों को आगे बढ़ाते हुए हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड (HLWB) के अकाउंट ऑफिसर जुगल किशोर और कॉन्ट्रैक्ट अकाउंट क्लर्क अमित कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को पूछताछ के लिए चंडीगढ़ स्थित सीबीआई मुख्यालय बुलाया गया था, जहां लंबी जिरह के बाद इन्हें हिरासत में ले लिया गया।

सीबीआई ने दोनों आरोपियों को विशेष अदालत में पेश कर दो दिनों का पुलिस रिमांड हासिल किया है, ताकि इस पूरे सिंडिकेट और शेल कंपनियों के नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। अदालत में अमित कुमार के वकील यवनीत ढाकला ने रिमांड का विरोध करते हुए दलील दी कि उनका मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग कर रहा है, इसलिए कस्टडी की जरूरत नहीं है, लेकिन कोर्ट ने एजेंसी की दलीलों को तरजीह दी।

फाइलों में फर्जीवाड़ा और जुगल किशोर के हस्ताक्षर से खुली पोल

जांच एजेंसी के मुताबिक, यह पूरा मामला श्रम विभाग बोर्ड की 50 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी पूंजी को सुनियोजित तरीके से ठिकाने लगाने का है। इस आपराधिक साजिश में निजी धुरंधरों और सरकारी मुलाजिमों ने मिलकर निवेश के सारे कायदे-कानूनों को मटियामेट कर दिया।

सीबीआई के रडार पर आए जुगल किशोर 21 अगस्त 2024 से बोर्ड में अकाउंट ऑफिसर के पद पर तैनात थे और वित्तीय लेनदेन के लिए अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (अथॉराइज्ड सिग्नेटरी) थे। आरोप है कि बोर्ड से एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) कराने की मंजूरी मिलने के बावजूद जुगल किशोर ने चुपके से एक सेविंग अकाउंट खुलवाने के कागजातों पर दस्तखत कर दिए। इतना ही नहीं, इसी बचत खाते में 50 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर करने वाले पत्रों पर भी जुगल के ही हस्ताक्षर पाए गए हैं।

क्लर्क अमित ने चली ‘बैक-डेट’ चाल, बैंक की चेतावनियों को किया नजरअंदाज

इस खेल में क्लर्क अमित कुमार की भूमिका भी बराबर की रही है। सीबीआई की पड़ताल में सामने आया है कि अमित ने निवेश से जुड़ी जो नोटशीट तैयार की, उसमें चालाकी से सेविंग अकाउंट खोलने की बात को छिपा लिया गया। बाद में जब गड़बड़ी पकड़े जाने का डर हुआ, तो रिकॉर्ड में बैक-डेट (पुरानी तारीख) में कथित एंट्री डालकर बचत खाते की जानकारी दर्ज की गई।

इसके बाद सह-आरोपी से मिली फर्जी एफडी रसीद को सरकारी फाइल का हिस्सा बनाकर उसे बाकायदा सत्यापित (वेरिफाई) भी कर दिया गया। हद तो तब हो गई जब बैंक के बड़े अधिकारियों ने खुद खाते में गड़बड़ी की बात बोर्ड को बताई, लेकिन इस आंतरिक चेतावनी के बावजूद जुगल और अमित ने मामले को दबाए रखा। उन्होंने सीधे बैंक से संपर्क साधने के बजाय बर्खास्त बैंक अफसर और मामले के सह-आरोपी अभय कुमार के जरिए ही सारा पत्राचार जारी रखा, जिसे सीबीआई पहले ही जेल भेज चुकी है।

तीन आईएएस और एक आईएफएस अधिकारी पहले से ही सलाखों के पीछे

इस घोटाले की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें हरियाणा का शीर्ष नौकरशाही तबका भी फंसा हुआ है। सीबीआई इस मामले में अब तक हरियाणा कैडर के तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों—पंकज अग्रवाल, आरके सिंह और प्रदीप डागर को गिरफ्तार कर चुकी है।

इनके साथ ही भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी विनीत श्रीवास्तव पर भी शिकंजा कसा जा चुका है। ये चारों हाई-प्रोफाइल आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत के तहत जेल में दिन काट रहे हैं। सीबीआई का मानना है कि नए आरोपियों से रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ में कुछ और बड़े चेहरों और शेल कंपनियों के नामों का खुलासा हो सकता है, जहां इस सरकारी धन को डायवर्ट किया गया था।

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