Ladwa News: रटने की आदत छोड़ें बच्चे, मदर टेरेसा स्कूल में टीचर्स को मिले ‘एक्टिव लर्निंग’ के खास टिप्स
मदर टेरेसा स्कूल के शिक्षकों के लिए आयोजित हुआ खास ट्रेनिंग सेशन
Ladwa News: (कैलाश गोयल) शिक्षा के बदलते परिवेश में अब केवल किताबी ज्ञान और रटंत प्रणाली के बूते बच्चों का भविष्य नहीं संवारा जा सकता। इसी सोच को धरातल पर उतारने के लिए लाडवा-पिपली मार्ग पर मथाना चौकी स्थित मदर टेरेसा मॉडर्न पब्लिक स्कूल के प्रांगण में अध्यापकों के लिए एक बेहद प्रभावी कार्यशाला का आयोजन किया गया।
‘एक्टिव लर्निंग’ विषय पर केंद्रित इस क्षमता निर्माण कार्यक्रम को लेकर स्कूल की प्रिंसिपल पूजा सक्सेना ने बताया कि बदलते दौर के साथ शिक्षकों का अपग्रेड होना बेहद जरूरी है। इस सेमिनार का मकसद शिक्षकों को ऐसी आधुनिक और रचनात्मक विधाओं से लैस करना था, जिससे स्कूल की चारदीवारी के भीतर दी जाने वाली शिक्षा विद्यार्थियों के लिए बोझ न बनकर व्यावहारिक और प्रभावशाली साबित हो।
डॉ. ममता ग्रोवर और नेहा सचदेवा ने दिए टिप्स, बताया- कैसे जगाएं बच्चों में क्रिएटिविटी
इस खास शैक्षणिक सत्र में शिक्षा जगत की जानी-मानी विशेषज्ञ डॉ. ममता ग्रोवर और श्रीमती नेहा सचदेवा ने मुख्य वक्ता (रिसोर्स पर्सन) के तौर पर शिरकत की। दोनों ही वक्ताओं ने बेहद सरल और इंटरैक्टिव अंदाज में अध्यापकों के साथ संवाद स्थापित किया। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि अक्सर बच्चे परीक्षा पास करने के लिए रटने का सहारा लेते हैं, जिससे उनकी स्वाभाविक मेधा दब जाती है।
विशेषज्ञों ने शिक्षकों का मार्गदर्शन करते हुए बताया कि क्लासरूम का माहौल ऐसा होना चाहिए जहां बच्चे सवाल पूछने से कतराएं नहीं। उन्होंने बच्चों के भीतर छिपी कल्पनाशीलता, तार्किक क्षमता (लॉजिकल थिंकिंग) और रचनात्मकता को उभारने के लिए कई व्यावहारिक प्रयोग साझा किए।
खेल-खेल में पढ़ाई और गतिविधियों पर रहा जोर, शिक्षकों ने भी दिखाया उत्साह
कार्यशाला के दौरान मुख्य वक्ताओं ने एक्टिविटी-बेस्ड लर्निंग यानी गतिविधियों पर आधारित शिक्षण को अपनाने की वकालत की। उन्होंने कुछ ऐसे मॉडल और खेलों के उदाहरण दिए जिनके माध्यम से कठिन से कठिन विषयों को भी आसानी से समझाया जा सकता है। खास बात यह रही कि स्कूल के तमाम शिक्षकों ने इस सत्र में एक छात्र की तरह पूरे उत्साह के साथ भाग लिया, नई तकनीकों को समझा और नोट्स तैयार किए।
कार्यक्रम के समापन पर स्कूल प्रबंधन ने दोनों विशेषज्ञ वक्ताओं को उनके बहुमूल्य मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रबंधन का मानना है कि इस तरह के ज्ञानवर्धक आयोजनों से शिक्षकों का बौद्धिक और व्यावसायिक विकास होता है, जिसका सीधा और सकारात्मक लाभ अंततः बच्चों के सर्वांगीण विकास के रूप में सामने आता है।
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