Namo Bharat Rapid Rail: फरीदाबाद से गुरुग्राम का सफर होगा बेहद आसान, HSVP ने फाइनल किए जमीन के नक्शे
फरीदाबाद से गुरुग्राम का सफर होगा बेहद आसान, HSVP ने फाइनल किए जमीन के नक्शे
Namo Bharat Rapid Rail: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के प्रमुख औद्योगिक और आईटी हब कहे जाने वाले गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा को एक ही सुपरफास्ट रेल नेटवर्क से जोड़ने की कवायद अब धरातल पर उतरती दिख रही है। बहुप्रतीक्षित नमो भारत RRTS (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर की फाइनल अलाइनमेंट को हरियाणा सरकार ने अपनी हरी झंडी दे दी है। लगभग 15,746 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस ड्रीम प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद चारों शहरों के बीच का अंतर मिनटों में सिमट जाएगा।
प्रस्तावित योजना के अनुसार, इस कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 64 किलोमीटर होगी, जिसमें से 52 किलोमीटर का लंबा दायरा हरियाणा की सीमा में आता है, जबकि बाकी का हिस्सा उत्तर प्रदेश के नोएडा-ग्रेटर नोएडा से जुड़ेगा। वर्तमान समय में गुरुग्राम से फरीदाबाद या नोएडा जाने वाले यात्रियों को घंटों सड़क पर ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ता है, लेकिन RRTS सेवा शुरू होने के बाद गुरुग्राम से फरीदाबाद का सफर मात्र 20 मिनट और नोएडा का सफर करीब 40 मिनट में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
18 स्टेशन और मेट्रो से कनेक्टेड होगा पूरा रूट, 4 घंटे चली समीक्षा बैठक
परियोजना के तहत पूरे कॉरिडोर में लगभग 18 आधुनिक स्टेशन विकसित किए जाएंगे। इन स्टेशनों की बनावट इस तरह तैयार की जा रही है कि यात्री RRTS से उतरकर सीधे स्थानीय मेट्रो लाइन पर इंटरचेंज कर सकें। हाल ही में इस योजना की समीक्षा को लेकर फरीदाबाद स्थित हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) दफ्तर में करीब 4 घंटे लंबी मैराथन बैठक हुई। बैठक में उन तमाम सेक्टरों और जमीनों के नक्शों की बारीकी से पड़ताल की गई, जहां से यह रूट गुजरने वाला है।
एचएसवीपी (HSVP) के अधीक्षण अभियंता संदीप दहिया ने बताया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य मार्ग में आने वाली किसी भी संभावित जमीन संबंधी अड़चन को समय रहते दूर करना था। फिलहाल रूट में किसी तरह की बड़ी प्रशासनिक अड़चन नहीं है। अधिकारियों का मानना है कि नमो भारत कॉरिडोर का निर्माण कार्य दिसंबर 2026 के आसपास शुरू हो सकता है और इसे 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
निजी वाहनों का दबाव घटेगा, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को भी संजीवनी
इस कॉरिडोर का सबसे अधिक लाभ फरीदाबाद और गुरुग्राम के बीच रोजाना आवाजाही करने वाले लाखों नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और कारोबारियों को मिलेगा। हर दिन पिक आवर्स में गुड़गांव-फरीदाबाद एक्सप्रेसवे और कालिंदी कुंज रोड पर लगने वाले भयंकर जाम से निजात मिलेगी। सार्वजनिक परिवहन के इतने तेज और सुगम विकल्प से सड़कों पर व्यक्तिगत गाड़ियों का दबाव काफी हद तक कम होगा, जिससे एनसीआर में प्रदूषण की समस्या से निपटने में भी बड़ी मदद मिलेगी।
आर्थिक दृष्टि से देखें तो 15,746 करोड़ रुपये के इस विशाल प्रोजेक्ट में हरियाणा सरकार का अंशदान लगभग 3,573 करोड़ रुपये होगा। चार बड़े कारोबारी केंद्रों के आपस में बेहद कम समय में जुड़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और वाणिज्यिक गतिविधियों में भारी उछाल आने की उम्मीद है।
