Nuh News: सर्कस में जिंदा दफन होने का दिखा रहा था स्टंट, दम घुटने से थमीं सांसें
पैसे इकट्ठा करने के चक्कर में 36 घंटे तक गड्ढे में दबा रहा युवक, तड़प-तड़पकर तोड़ा दम
Nuh News: हरियाणा के नूंह (मेवात) जिले से एक हैरान और झकझोर कर रख देने वाला मामला सामने आया है। तावडू उपमंडल के खोरी कलां गांव में चल रहे एक ट्रैवलिंग बाइसिकल सर्कस के दौरान मौत का खतरनाक खेल खेला गया, जिसने एक 27 साल के नौजवान की जिंदगी छीन ली। जमीन के नीचे ’24 घंटे जिंदा दफन’ रहने का करतब दिखा रहे युवक को आयोजकों ने 36 घंटे तक गड्ढे से बाहर ही नहीं निकाला। नतीजतन, ऑक्सीजन की कमी और दम घुटने से उसकी अंदर ही मौत हो गई।
इस दर्दनाक हादसे की शिकार बने मृतक की पहचान फरीदाबाद जिले के गौंची गांव निवासी दीपक (27) के रूप में हुई है। दीपक पिछले एक हफ्ते से खोरी कलां गांव के एक खाली प्लॉट में लगे साइकिल सर्कस में अपने हैरतअंगेज करतबों से ग्रामीणों का मनोरंजन कर रहा था।
24 घंटे का दावा और 36 घंटे का खौफनाक अंत
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों के मुताबिक, खोरी कलां में बीते सात दिनों से यह बाइसिकल सर्कस चल रहा था। दीपक साइकिल के हैंडलबार पर संतुलन बनाने, बिना देखे साइकिल चलाने और चलती साइकिल पर खड़े होने जैसे रोमांचक स्टंट दिखाता था। सर्कस के आखिरी दिन आयोजकों ने दर्शकों को आकर्षित करने के लिए एक बेहद खतरनाक स्टंट का ऐलान किया।
योजना के मुताबिक, जमीन में एक गहरा गड्ढा खोदा गया। दीपक को एक बोरी के अंदर बैठाकर गड्ढे में उतारा गया और ऊपर से पूरी मिट्टी डाल दी गई। आयोजकों ने भीड़ के सामने दावा किया कि दीपक 24 घंटे तक बिना हवा-पानी के जमीन के नीचे जीवित रहेगा और अगले दिन उसे सही-सलामत बाहर निकाल लिया जाएगा। लेकिन यही दावा दीपक के लिए काल बन गया।
‘जब तक 7,100 रुपये नहीं मिलेंगे, बाहर नहीं निकालेंगे’
इस पूरे घटनाक्रम में आयोजकों की संवेदनहीनता और लालच का खौफनाक चेहरा सामने आया है। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी संचित सिंह ने बताया कि 24 घंटे का तय समय बीत जाने के बाद भी जब ग्रामीणों ने दीपक को बाहर निकालने को कहा, तो सर्कस संचालकों ने साफ मना कर दिया।
आयोजकों ने देखने आई भीड़ के सामने शर्त रख दी कि जब तक देखने वाले लोग आपस में चंदा इकट्ठा करके 7,100 रुपये की राशि उनके हाथ में नहीं थमा देते, तब तक गड्ढा नहीं खोदा जाएगा। पैसों की इसी खींचतान और मनमानी के चक्कर में दीपक को तय वक्त से करीब 12 घंटे ज्यादा, यानी कुल 36 घंटे तक मिट्टी के नीचे दबाए रखा गया।
जब भारी दबाव के बाद आखिरकार गड्ढे को खोदा गया, तो अंदर दीपक बेसुध पड़ा मिला। आनन-फानन में उसकी सांसें जांचने की कोशिश की गई, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। कयास लगाए जा रहे हैं कि लंबे समय तक तंग जगह में बंद रहने के कारण दम घुटने से उसकी दर्दनाक मौत हुई।
इलाके में सनसनी, पुलिस ने शुरू की पड़ताल
इस खौफनाक हादसे के बाद खोरी कलां और आसपास के गांवों में भारी गुस्सा और सनसनी का माहौल है। बिना किसी सुरक्षा इंतजाम और प्रशासनिक मंजूरी के इस तरह के जानलेवा स्टंट आयोजित करने को लेकर स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं।
घटना की सूचना मिलने के बाद तावडू थाना पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर मामले की गहनता से तफ्तीश की जा रही है। स्टंट आयोजित करने वाले लोगों और सर्कस संचालकों की भूमिका की जांच की जा रही है, जिसके बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
