July 13, 2026

Over Apologizing Psychology: कहीं आपकी भी तो नहीं है बात-बात पर ‘सॉरी’ बोलने की आदत? मनोवैज्ञानिकों से जानिए इसके पीछे की असली वजह

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Over Apologizing Psychology: कहीं आपकी भी तो नहीं है बात-बात पर 'सॉरी' बोलने की आदत? मनोवैज्ञानिकों से जानिए इसके पीछे की असली वजह

कहीं आपकी भी तो नहीं है बात-बात पर 'सॉरी' बोलने की आदत

Over Apologizing Psychology: क्या आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो किसी से रास्ता पूछते समय, किसी की बात को बीच में टोकते वक्त या फिर बिना किसी कसूर के भी बातचीत के अंत में तुरंत ‘सॉरी’ बोल देते हैं? हमारे समाज में इस तरह के व्यवहार को अमूमन बेहद संस्कारी और शालीन माना जाता है. लेकिन मनोविज्ञान की दुनिया इस ‘सॉरी’ के पीछे छिपे इंसानी दिमाग के कई अनसुलझे पहलुओं को उजागर करती है.

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि हर समय और हर स्थिति में माफी मांगना (Over Apologizing) हमेशा अच्छी आदत नहीं होती. कई बार यह आदत गहरे बैठे डर, आत्मविश्वास की कमी और खुद को दूसरों से कम आंकने की मानसिक ग्रंथि का नतीजा होती है.

क्यों कुछ लोग बन जाते हैं ‘पीपल प्लीज़र’ और हर बात पर खुद को ठहराते हैं दोषी?

इस आदत की जड़ें अक्सर इंसान के अतीत और उसके परिवेश से जुड़ी होती हैं. कुछ बच्चों को बचपन से ही सिखाया जाता है कि उन्हें हर हाल में दूसरों को खुश रखना है और किसी को भी नाराज नहीं करना है. यही सीख बड़े होने तक एक मानसिक बोझ बन जाती है, जहां व्यक्ति हर अप्रिय स्थिति के लिए अनजाने में खुद को ही जिम्मेदार मान लेता है.

इसके अलावा, रिश्तों के टूटने का डर, अकेले पड़ जाने की चिंता या सामने वाले की नाराजगी मोल न लेने की इच्छा इंसान को एक ‘पीपल प्लीज़र’ (सबको खुश रखने वाला) बना देती है. नतीजा यह होता है कि व्यक्ति बिना सोचे-समझे अपनी जुबान पर ‘सॉरी’ शब्द को बैठा लेता है.

सही जगह पर मांगी गई माफी बढ़ाती है सम्मान, बेवजह का विलाप घटाता है साख

बेशक, अपनी गलती को स्वीकार करना एक महान गुण है. अगर आपकी किसी लापरवाही से किसी का नुकसान हुआ हो, किसी के जज्बातों को ठेस पहुंची हो या आपसे वास्तव में कोई चूक हुई हो, तो वहां पूरे दिल से माफी मांगना आपके बड़प्पन और जिम्मेदारी को दिखाता है. इससे न केवल रिश्ते मजबूत होते हैं बल्कि सामने वाले के मन में आपके प्रति सम्मान और बढ़ जाता है.

लेकिन संकट तब खड़ा होता है जब आप बिना किसी गलती के भी इस शब्द का ढाल की तरह इस्तेमाल करने लगते हैं. ऐसा करने से धीरे-धीरे आपके आत्मसम्मान का ग्राफ गिरने लगता है और आप अपनी बात को मजबूती से रखने का हौसला खो देते हैं.

वर्कप्लेस से लेकर निजी रिश्तों तक, कमजोर इमेज बनने का रहता है खतरा

पेशेवर जिंदगी (वर्कप्लेस) में बार-बार ‘सॉरी’ बोलने वाले कर्मचारियों को अक्सर लोग जरूरत से ज्यादा झिझकने वाला या कम योग्य मान लेते हैं. इससे आपकी बात का वजन खत्म हो जाता है और आपके नेतृत्व करने की क्षमता पर सवाल उठने लगते हैं. वहीं, निजी रिश्तों में भी सामने वाला पार्टनर या दोस्त यह मान लेता है कि आप हर परिस्थिति में झुकने को तैयार हैं, जिससे रिश्तों का संतुलन बिगड़ने लगता है.

अनुभवी जानकारों का कहना है कि ‘सॉरी’ की जगह ‘थैंक यू’ जैसे शब्दों का प्रयोग करना ज्यादा बेहतर होता है. उदाहरण के लिए, “लेट होने के लिए सॉरी” कहने के बजाय “मेरा इंतजार करने के लिए शुक्रिया” कहना आपके आत्मविश्वास को दर्शाता है.

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