July 13, 2026

Monsoon Food Science: बारिश होते ही क्यों मचलता है पकौड़े और समोसे खाने का मन? जानें इसके पीछे का असली विज्ञान

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Monsoon Food Science: बारिश होते ही क्यों मचलता है पकौड़े और समोसे खाने का मन? जानें इसके पीछे का असली विज्ञान

बारिश और चाय-पकौड़े का क्या है कनेक्शन? सिर्फ स्वाद नहीं, आपके दिमाग के इस सीक्रेट से जुड़ी है ये क्रेविंग

Monsoon Food Science: मॉनसून की पहली दस्तक के साथ ही फिजां में मिट्टी की सोंधी खुशबू तैरने लगती है। इस खुशनुमा माहौल में खिड़की के पास बैठकर कड़क चाय के साथ समोसे या छनते हुए पकौड़ों का लुत्फ उठाना भला किसे पसंद नहीं होगा।

अक्सर हम इसे एक सामान्य सी आत मान लेते हैं, लेकिन डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की मानें तो इस क्रेविंग (तीव्र इच्छा) के पीछे हमारे शरीर की एक खास बायोकेमिकल प्रक्रिया काम करती है। मौसम में आने वाला अचानक बदलाव सीधे तौर पर हमारी खाने की पसंद को नियंत्रित करने लगता है।

पहली वजह: ठंडे मौसम में शरीर को चाहिए एक्स्ट्रा कैलोरी और गर्माहट

जैसे ही आसमान में बादल छाते हैं और ठंडी हवाएं चलने लगती हैं, हमारे आसपास का तापमान तेजी से गिरता है। इस बदलते माहौल में अपने आंतरिक तापमान को संतुलित रखने के लिए इंसानी शरीर को ज्यादा ऊर्जा यानी गर्माहट की जरूरत होती है।

यही वजह है कि हमारा बदन ऐसी चीजों की तरफ भागता है जो तुरंत एनर्जी दें। गरमा-गरम, कुरकुरे और वसा (फैट) से भरपूर पकौड़े या समोसे इस जरूरत को फौरी तौर पर पूरा कर देते हैं। चाय की चुस्की के साथ इनका मेल शरीर को अंदरूनी सिहरन से बचाकर राहत देता है।

दूसरी वजह: ‘हैप्पी हार्मोन्स’ का लोचा और बचपन की यादें

मनोविज्ञान की भाषा में इसे ‘इमोशनल ईटिंग’ और ‘कम्फर्ट फूड’ के कॉम्बिनेशन से जोड़कर देखा जाता है। अमूमन बारिश के दिनों में धूप कम होने से दिमाग में सेरोटोनिन ( serotonin – मूड को अच्छा रखने वाला हार्मोन) का स्तर थोड़ा कम हो जाता है। ऐसे में दिमाग तुरंत किसी ऐसी चीज की मांग करता है जिससे उसे इंसटेंट खुशी या मानसिक संतुष्टि मिले।

कार्बोहाइड्रेट और फैट से भरपूर ये स्नैक्स दिमाग में डोपामाइन का स्राव बढ़ाते हैं। इसके अलावा, बचपन से ही हमारे परिवारों में बारिश के दिन कड़ाही चढ़ने की एक अनकही रवायत रही है। यह पुरानी याद हमारे अवचेतन मन में इस कदर दर्ज है कि बादलों के गरजते ही पैर सीधे रसोई की तरफ मुड़ जाते हैं।

स्वाद के चक्कर में सेहत से समझौता न करें, आजमाएं ये विकल्प

बारिश का खुशनुमा मिजाज भले ही खाने का स्वाद दोगुना कर देता हो, लेकिन लगातार जीभ के चटोरेपन के आगे घुटने टेकना भारी पड़ सकता है। मॉनसून के दौरान हमारी शारीरिक सक्रियता (फिजिकल एक्टिविटी) कम हो जाती है और पाचन तंत्र भी थोड़ा सुस्त रहता है। ऐसे में रोज-रोज भारी और तली-भुनी चीजें खाने से वजन बढ़ने, एसिडिटी, गैस और कोलेस्ट्रॉल की समस्या खड़ी हो सकती है।

अगर आप इस सुहावने मौसम का मजा भी लेना चाहते हैं और सेहत को भी दांव पर नहीं लगाना चाहते, तो अपनी कुकिंग स्टाइल में थोड़ा बदलाव कर सकते हैं। इन दिनों किचन में एयर-फ्रायर का इस्तेमाल एक बेहतरीन विकल्प है, जिसमें बेहद कम या बिना तेल के भी पकौड़े कुरकुरे बनते हैं। इसके अलावा कम तेल में बने सूजी के अप्पे, बेसन का चीला या सब्जियों से भरपूर भुने हुए स्नैक्स खाकर भी आप अपनी इस मॉनसूनी क्रेविंग को बिना किसी गिल्ट के शांत कर सकते हैं।

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