Rohtak News: रोहतक के भैणी चंद्रपाल में जलभराव से हाहाकार, बंद पड़े पंप ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुसीबत
रोहतक के भैणी चंद्रपाल में जलभराव से हाहाकार, बंद पड़े पंप ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुसीबत
Rohtak News: रोहतक जिले के महम उपमंडल स्थित गांव भैणी चंद्रपाल में जलभराव की समस्या ने एक बार फिर विकराल रूप ले लिया है। गांव की जिस मुख्य गली से हर दिन सैकड़ों लोग गुजरते हैं, वह अब जोहड़ में तब्दील हो चुकी है। ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद जल निकासी के लिए डीजल पंप सेट तो जरूर लगाया गया, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि यह पंप रात से ही बंद पड़ा है। नतीजतन, मुख्य रास्ते पर दोबारा पानी भर गया और ग्रामीणों का अपने ही घरों से निकलना मुश्किल हो गया है।
गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने करीब 10 दिन पहले ही सरपंच को इस पूरी स्थिति से वाकिफ करा दिया था। इसके बावजूद वक्त रहते ठोस कदम उठाने के बजाय खानापूर्ति की गई। सरपंच ने पंप लगाने का आश्वासन जरूर दिया, लेकिन वह भी सफेद हाथी साबित हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अगर प्रशासन ने पहले ही सुध ली होती तो आज पूरा गांव इस तरह नरकीय जीवन जीने को मजबूर न होता।
3 साल पहले बनी गली, लेकिन पानी निकासी का इंतजाम जीरो
किसान सभा के हलका अध्यक्ष शमशेर सिवाच ने गांव की जमीनी स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यह समस्या कोई एक-दो दिन की नहीं है। करीब तीन साल पहले इस मुख्य गली का निर्माण कराया गया था, लेकिन ठेकेदार और अधिकारियों ने जल निकासी का कोई स्थाई इंतजाम नहीं किया। नतीजा यह है कि थोड़ी सी बरसात या पानी का बहाव होते ही पूरी गली लबालब हो जाती है।
शमशेर सिवाच के मुताबिक, इस लापरवाही के खिलाफ सीएम विंडो से लेकर जिला प्रशासन के आला अधिकारियों तक दर्जनों शिकायतें भेजी जा चुकी हैं। लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिले, धरातल पर कोई स्थाई समाधान नहीं निकला। आज हालात यह हैं कि गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को अपने ही घरों में पहुंचने के लिए लंबे और उबड़-खाबड़ रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।
सड़ते पानी से महामारी का डर, खेतों में भी डूबी किसानों की मेहनत
मुख्य गली में हफ्तों से जमा गंदा पानी अब सड़ने लगा है। पूरे इलाके में बदबू फैली हुई है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का सीधा खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों को डर है कि अगर जल्द पानी नहीं निकाला गया तो गांव में मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियां पैर पसार लेंगी।
सिर्फ गांव के भीतर ही नहीं, बल्कि बाहर खेतों में भी हालात बेहद चिंताजनक हैं। किसान सभा अध्यक्ष ने बताया कि पिछले साल भी खेतों में 6-6 फीट तक पानी भर गया था, जिससे किसानों की फसलें पूरी तरह तबाह हो गई थीं। इस बार भी जलभराव के कारण खेतों में खड़ी फसलें सड़ने की कगार पर हैं।
उग्र आंदोलन की तैयारी में ग्रामीण
प्रशासन और पंचायत की अनदेखी से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। किसान सभा के हलका अध्यक्ष शमशेर सिवाच ने दोटूक कहा कि अगर जिला प्रशासन ने अगले कुछ घंटों के भीतर जल निकासी का कोई स्थाई और पुख्ता समाधान नहीं निकाला, तो ग्रामीण लोकतांत्रिक तरीके से बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने साफ किया कि इस स्थिति में यदि कोई अप्रिय घटना होती है या कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी रोहतक जिला प्रशासन की होगी।
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