Yamunanagar PNB Farmers Protest: यमुनानगर पीएनबी बैंक के गेट पर किसानों का ताला, बेसहारा बुजुर्ग के लोन सेटलमेंट को लेकर आर-पार की जंग
यमुनानगर में दो दिन से बंद पड़ा पंजाब नेशनल बैंक
Yamunanagar PNB Farmers Protest: यमुनानगर। जब व्यवस्था संवेदनाएं खो देती है, तो आंदोलनों का जन्म होता है; लेकिन जब उन आंदोलनों की आंच सीधे आम जनता तक पहुंचने लगे, तो तस्वीरें डराने वाली हो जाती हैं. यमुनानगर के व्यस्ततम विश्वकर्मा चौक स्थित पंजाब नेशनल बैंक के बाहर मंगलवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला. भारतीय किसान यूनियन का धरना आज दूसरे दिन भी पूरी आक्रामकता के साथ जारी रहा. किसानों ने बैंक के मुख्य चैनल गेट पर अपना ताला जड़ दिया है और वहीं पर दरी बिछाकर डट गए हैं. नतीजा यह है कि बैंक के भीतर सन्नाटा पसरा है और बाहर अपनी गाढ़ी कमाई की निकासी या जरूरी सरकारी-निजी कामों के लिए आ रहे सैकड़ों उपभोक्ता बेबसी में अपना सिर पकड़कर खड़े हैं.
“रिश्तेदार अस्पताल में है, पैसे कैसे भेजूं?”— बैंक के बंद दरवाजे देख छलका उपभोक्ताओं का दर्द
किसानों के इस विरोध प्रदर्शन ने सीधे तौर पर उन आम लोगों की कमर तोड़ दी है, जिनका इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है. कैंप कॉलोनी के रहने वाले मंगत राम की परेशानी इसका जीता-जागता उदाहरण है. उन्होंने रुआंसे गले से बताया कि राजस्थान में रहने वाले उनके एक करीबी रिश्तेदार को बेहद जरूरी काम और मेडिकल इमरजेंसी के लिए पैसों की दरकार थी. वे नकद जमा कराने पीएनबी पहुंचे थे, लेकिन यहां तो ताला लटका मिला. अब वे परेशान हैं कि वक्त पर मदद कैसे पहुंचेगी.
उपभोक्ताओं की आपबीती: ऐसी ही आपबीती कैंप निवासी चीनू की भी है. उनके खाते की ट्रांजैक्शन तकनीकी कारणों से ब्लॉक हो गई है, जिसे चालू कराने के लिए वे सोमवार के बाद मंगलवार को भी चक्कर काटती रहीं. वहीं जोड़ियां गांव की कमलेश को घरेलू काम के लिए नकदी की सख्त जरूरत थी, लेकिन बैंक के बंद दरवाजों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया.
दो बेटों को खो चुके 77 वर्षीय मोहन सिंह पर रिकवरी का दबाव; क्या कहता है किसान संगठन?
आखिरकार किसान इतने बड़े सरकारी बैंक को बंधक बनाकर क्यों बैठे हैं? इस सवाल के पीछे एक बेहद भावुक और दर्दनाक कहानी है. भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों के मुताबिक, जम्मू कॉलोनी के रहने वाले 77 साल के बुजुर्ग किसान मोहन सिंह के बेटे ने पीएनबी से करीब 10 लाख रुपये का होम लोन लिया था. किस्मत की मार देखिए कि उस कर्जदार बेटे का असामयिक निधन हो गया. बुजुर्ग मोहन सिंह के सिर पर दुखों का पहाड़ यहीं नहीं टूटा, उनके दूसरे बेटे की भी मौत हो चुकी है. इस उम्र में दोनों कमाऊ बेटों को खोने के बाद परिवार के पास आय का कोई भी साधन नहीं बचा है.
इसके बावजूद, बुजुर्ग ने अपनी ईमानदारी दिखाते हुए जैसे-तैसे करीब साढ़े चार लाख रुपये बैंक के खाते में जमा भी कराए. लेकिन अब वे बाकी की रकम चुकाने में पूरी तरह असमर्थ हैं. भाकियू के जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर का सीधा आरोप है कि बैंक प्रबंधन इस मानवीय त्रासदी को समझने की बजाय बुजुर्ग के घर पर बार-बार नोटिस चस्पा कर रहा है और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है.
किसानों का साफ कहना है कि जब तक बैंक इस मामले में व्यावहारिक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए लोन का वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) नहीं करता, तब तक बैंक का ताला नहीं खुलेगा. उन्होंने जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही बैंक के बड़े अधिकारियों ने इस पर सुध नहीं ली, तो वे शहर की मुख्य सड़कों को जाम करने से भी गुरेज नहीं करेंगे.
