Thought of the Day: जानिए क्यों गुस्सा दूसरों से ज्यादा खुद आपके शरीर को अंदर से खोखला कर रहा है
गुस्से की आग में सबसे पहले जलता है खुद का विवेक
Thought of the day: आज की आपाधापी भरी जिंदगी में छोटी-छोटी बातों पर भड़क जाना एक आम मानवीय स्वभाव बनता जा रहा है। लेकिन कभी ठंडे दिमाग से सोचिए कि जब आप किसी पर गुस्सा करते हैं, तो नुकसान किसका होता है? संत-महात्माओं से लेकर आधुनिक मनोवैज्ञानिकों तक का यही मानना है कि क्रोध एक ऐसा तेजाब है, जो जिस बर्तन में रखा जाता है, सबसे पहले उसी को गलता है। यानी, आप जिसके खिलाफ आक्रोश जता रहे हैं, उस तक आपकी भावनाएं बाद में पहुंचती हैं, जबकि आपका अपना अंदरूनी तंत्र पहले झुलस जाता है।
चिकित्सा विज्ञान की मुहर: शरीर को खोखला करता है आवेश
लगातार गुस्सा करने की आदत सिर्फ सामाजिक छवि ही खराब नहीं करती, बल्कि यह सीधे तौर पर आपके शरीर को मौत के कुएं की तरफ धकेलती है। डॉक्टरों के अनुसार, जब इंसान अत्यधिक क्रोधित होता है, तो शरीर में ‘कोर्टिसोल’ और ‘एड्रेनालाईन’ जैसे तनाव पैदा करने वाले हार्मोन का स्तर अचानक तेजी से बढ़ जाता है। इसके परिणामस्वरूप ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है, दिल की धड़कनें बेकाबू हो जाती हैं और ब्रेन हैमरेज या हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सीधे शब्दों में कहें, तो गुस्से का हर एक दौर आपकी जिंदगी के कुछ साल कम कर देता है।
विवेक का अंत और रिश्तों का बिखराव
क्रोध की सबसे बड़ी कड़वी सच्चाई यह है कि यह इंसान के सोचने-समझने की शक्ति (विवेक) को पूरी तरह शून्य कर देता है। आवेश में आकर व्यक्ति सही और गलत का अंतर भूल जाता है। अक्सर देखा गया है कि दफ्तर के तनाव या घरेलू अनबन में गुस्से में बोले गए कड़वे बोल उन रिश्तों को हमेशा के लिए तोड़ देते हैं, जिन्हें संवारने में आधी उम्र बीत जाती है। सामने वाला व्यक्ति शायद आपके गुस्से को भूल भी जाए, लेकिन जो मानसिक और वैचारिक क्षति आपने स्वयं को पहुंचाई है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो पाती।
नियंत्रण ही एकमात्र विकल्प: मौन को बनाएं ढाल
सवाल उठता है कि इस आत्मघाती भावना से पार कैसे पाया जाए? विचारकों का मत है कि क्रोध को दबाना नहीं, बल्कि उसे दिशा देना जरूरी है। जब भी भीतर गुस्से का गुबार उठे, तो तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ पलों के लिए मौन धारण कर लेना सबसे सटीक उपाय है। गहरी सांसें लेना और उस स्थान से कुछ देर के लिए हट जाना तात्कालिक नुकसान से बचा लेता है। अंततः, शांत मन ही जीवन की असली पूंजी है, और खुद को स्वस्थ रखने के लिए गुस्से की इस आग को शांत रखना ही पड़ेगा।
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