Char Dham Yatra 2026: दो महीने में 45 लाख श्रद्धालुओं का नया रिकॉर्ड, सीएम धामी ने हरिद्वार में साझा किए आंकड़े
'विकास भी और विरासत भी', हरिद्वार महाकुंभ को लेकर मुख्यमंत्री धामी का बड़ा संकल्प
Char Dham Yatra 2026: हरिद्वार। देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को वैश्विक पटल पर नई ऊंचाइयां देने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार को हरिद्वार पहुंचे। मौका था प्रेमनगर आश्रम में आयोजित पूज्य मोरारी बापू की नौ दिवसीय ‘श्रीराम कथा’ के भव्य समापन समारोह का।
खचाखच भरे पंडाल में उमड़े श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार की इस पावन धरा पर उन्हें एक अलौकिक और अद्वितीय आध्यात्मिक सुख की अनुभूति हो रही है। उन्होंने मोरारी बापू के प्रति श्रद्धा भाव प्रकट करते हुए कहा कि बापू केवल श्रीराम के चरित्र को शब्दों में पिरोने वाले वाचक नहीं हैं, बल्कि वे मर्यादा पुरुषोत्तम के आदर्शों, जीवन-दर्शन और सनातन संस्कारों को दुनिया भर में फैलाने वाले सच्चे युगदृष्टा हैं।
“वैश्विक हिंसा के दौर में मार्गदर्शक है सनातन दर्शन”
समारोह के दौरान देश-दुनिया के मौजूदा हालातों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने वैश्विक शांति का सूत्र भी साझा किया। उन्होंने कहा,
“आज जब पूरी दुनिया युद्ध, आपसी हिंसा और आतंकवाद जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है, तब भारत की महान सनातन संस्कृति का ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (पूरी पृथ्वी ही हमारा परिवार है) का सिद्धांत संपूर्ण मानवता को सही राह दिखा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में आज पूरा देश एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहा है।”
सीएम धामी ने साफ किया कि उनकी सरकार देवभूमि उत्तराखंड को केवल एक पर्यटन राज्य नहीं, बल्कि पूरे विश्व की ‘आध्यात्मिक राजधानी’ के रूप में स्थापित करने के ध्येय के साथ रात-दिन काम कर रही है। इसी कड़ी में हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, केदारखंड-मानसखंड मंदिर माला मिशन और प्राचीन मंदिरों के कायाकल्प की योजनाएं धरातल पर तेजी से दौड़ रही हैं।
चारधाम और मानसरोवर यात्रा ने रचे नए कीर्तिमान
मुख्यमंत्री ने राज्य में बेहतर हो रहे बुनियादी ढांचे और ऑल वेदर कनेक्टिविटी का हवाला देते हुए कुछ बेहद उत्साहजनक आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि इस साल की धार्मिक यात्राओं ने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ बताया कि कभी बेहद दुर्गम और सीमित मानी जाने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा पर अब रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। गत 5 जुलाई को ही उन्हें इस यात्रा के पहले आधिकारिक दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने का सौभाग्य मिला था। यह सुरक्षित यात्रा प्रबंधन में उत्तराखंड पुलिस और प्रशासन की बड़ी कामयाबी है।
कुंभ-2027: विरासत और विकास का महासंगम
अपने संबोधन के आखिरी पड़ाव में मुख्यमंत्री ने साल 2027 में हरिद्वार की धरती पर होने वाले आगामी महाकुंभ को लेकर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि कुंभ केवल साधु-संतों और आस्था का जमावड़ा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और हमारी महान सनातन परंपरा का महापर्व है। सरकार ‘विकास भी और विरासत भी’ के मंत्र पर चलते हुए कुंभ-2027 को अब तक का सबसे दिव्य, भव्य और तकनीकी रूप से सुरक्षित आयोजन बनाने के लिए अभी से खाका तैयार कर चुकी है। उन्होंने जनता से संतों के दिखाए मार्ग पर चलने की अपील की।
इस गरिमामयी समापन समारोह में परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी समेत शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और भारी संख्या में संत समाज मौजूद रहा।
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