Panchkula School Case: हरियाणा के पंचकूला स्थित एक सरकारी स्कूल में छह साल की मासूम बच्ची के साथ हुई क्रूरता के मामले में प्रशासनिक और विभागीय कार्रवाई तेज हो गई है। हरियाणा शिक्षा विभाग ने लापरवाही और अनुशासनहीनता पर कड़ा कदम उठाते हुए सेक्टर-20 स्थित शहीद मेजर अनुज राजपूत राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल नीलू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन की यह कार्रवाई हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के नियम-5 के तहत की गई है। इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई से शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है।
दो शिक्षिकाएं पहले ही हो चुकी हैं निलंबित, आरोपी छात्र ऑब्जर्वेशन होम भेजा
इस दर्दनाक घटना के बाद से लगातार एक्शन का दौर जारी है। शनिवार देर रात विभाग ने कार्रवाई करते हुए जेबीटी अध्यापिका पूजा रानी और सिमरनजीत कौर को भी सस्पेंड कर दिया था। पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ था कि आरोपी छात्र के हिंसक व्यवहार को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आई थीं, जिस पर शिक्षकों ने चेतावनी भी दी थी।
घटना के दिन बच्ची द्वारा छात्र के व्यवहार पर आपत्ति जताने और शिकायत करने की बात कहने पर भड़के तीसरी कक्षा के 8 वर्षीय छात्र ने इस वारदात को अंजाम दिया। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेश करने के बाद आरोपी छात्र को फिलहाल अंबाला के ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया गया है।
एडीसी की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित, सरकार ने बिठाया प्रशासनिक पहरा
मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के निर्देशों पर पंचकूला के डीसी सतपाल शर्मा ने एडीसी विवेक की अगुवाई में चार सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन किया है। इस समिति में पिंजौर के ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर (BEO), सार्थक स्कूल की प्रिंसिपल और सेक्टर-19 स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की प्रिंसिपल निर्मल ढुल को शामिल किया गया है। कमेटी यह खंगालेगी कि स्कूल परिसर में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई और सुरक्षा व्यवस्था में कहां-कहां खामियां रहीं।
पीजीआई में भर्ती है मासूम, निदेशक प्रो. विवेक लाल ने बंधाया ढांढस
उधर, चंडीगढ़ पीजीआई (PGIMER) में उपचाराधीन 6 साल की मासूम की सेहत पर डॉक्टरों की विशेष टीम नजर रख रही है। रविवार को पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल खुद अस्पताल पहुंचे और बच्ची से मिलकर उसका हाल जाना। उन्होंने इलाज कर रही डॉक्टरों की टीम से बातचीत कर चिकित्सा व्यवस्था का जायजा लिया।
पीजीआई प्रशासन ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए बच्ची का पूरा इलाज निःशुल्क करने का बड़ा फैसला लिया है और उसे प्राइवेट रूम की सुविधा भी मुहैया कराई गई है। डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची की हालत अब खतरे से बाहर है, लेकिन इस दर्दनाक घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है।
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