Wheat Sowing Tips: धान की कटाई संपन्न होने के साथ ही मैदानों में रबी सीजन की सरगर्मियां बढ़ गई हैं। किसान अब गेहूं की बुवाई की तैयारियों में पूरी तरह जुट चुके हैं। अच्छी पैदावार हासिल करने के लिए सही किस्म का चुनाव, सही समय पर बुवाई और खाद का संतुलित इस्तेमाल बेहद निर्णायक होता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने किसानों के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि सिंचित खेतों में नवंबर के चौथे सप्ताह तक बुवाई की जा सकती है, जबकि हैप्पी सीडर या सुपर सीडर से पराली प्रबंधन करने वाले किसानों को पूरे पंजाब में ‘पीबीडब्ल्यू 869’ किस्म लगाने की सिफारिश की गई है।
क्षेत्र और मिट्टी के हिसाब से इन किस्मों का करें चयन
कृषि वैज्ञानिकों ने सिंचित परिस्थितियों के लिए पीबीडब्ल्यू 677, एचडी-3086, उन्नत पीबीडब्ल्यू 343, पीबीडब्ल्यू 1 चपाती, पीबीडब्ल्यू 1 जिंक, पीबीडब्ल्यू जिंक 2, डब्ल्यूएचडी 943 और पीबीडब्ल्यू 291 किस्मों को सबसे उपयुक्त बताया है।
इसके अलावा उप-पर्वतीय जिलों को छोड़ दिया जाए, तो पूरे पंजाब में डीबीडब्ल्यू 222 की बुवाई की जा सकती है। वहीं, दक्षिण-पश्चिमी पंजाब की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए वहां के किसानों को पीबीडब्ल्यू 803 किस्म की बुवाई की सलाह दी गई है। बारानी (असिंचित) क्षेत्रों में पीबीडब्ल्यू 660 किस्म की बुवाई का उपयुक्त समय अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से ही शुरू हो चुका है।
गुल्ली-डंडा खरपतवार पर यूं लगाएं लगाम
गेहूं की फसल में सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरने वाले ‘गुल्ली-डंडा’ (मंडूसी/गुल्ली डंडा) खरपतवार को रोकने के लिए वैज्ञानिकों ने बुवाई के तुरंत बाद सतर्कता बरतने को कहा है। एडवाइजरी के मुताबिक, बुवाई के 2 दिन के भीतर ही प्री-इमर्जेंस शाकनाशी का छिड़काव कर देना चाहिए। इसके लिए प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में मिलाकर स्टांप 30 ईसी (1.5 लीटर), ऑकिरा या मोमिजी 85 डब्ल्यूजी (60 ग्राम), प्लेटफार्म 385 एसई (1 लीटर) या फिर दक्ष प्लस 48 ईसी की निर्धारित मात्रा का इस्तेमाल करें। ध्यान रहे कि इनमें से किसी एक ही रसायन का प्रयोग करना है।
खाद की संतुलित मात्रा और एमएसपी की स्थिति
उर्वरक प्रबंधन पर प्रकाश डालते हुए PAU के विशेषज्ञों ने बताया कि मध्यम उर्वरता वाली सिंचित जमीन में बुवाई के वक्त प्रति एकड़ 55 किलो डीएपी (DAP) डालना चाहिए। यदि किसान फास्फोरस की पूर्ति के लिए सिंगल सुपर फास्फेट का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो 155 किलो सिंगल सुपर फास्फेट के साथ 20 किलो यूरिया खेत की तैयारी के समय या बुवाई से पहले सिंचाई से ठीक पूर्व डालें।
जिन खेतों की मिट्टी में पोटाश की कमी है, वहां प्रति एकड़ 20 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश मिलाना फायदेमंद रहेगा। बता दें कि केंद्र सरकार ने इस सीजन के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,610 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।
यह भी पढ़ें–Panipat Accident: पानीपत जीटी रोड पर तड़के पलटा सेब से भरा ट्रक, हाईवे पर बिखरीं सैकड़ों पेटियां


