Haryana Roadways Strike: हरियाणा में त्योहारी सीजन के ठीक मुहाने पर खड़े संकट के बादल फिलहाल छंट गए हैं। राज्यभर के रोडवेज कर्मचारियों ने 5 नवंबर से दो दिनों के लिए प्रस्तावित अपनी हड़ताल को स्थगित करने का बड़ा फैसला लिया है। यह फैसला चंडीगढ़ स्थित हरियाणा सचिवालय में बुधवार को सरकार और रोडवेज यूनियनों के बीच हुई मैराथन बैठक के बाद आया। अधिकारियों और 12 अलग-अलग यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच करीब साढ़े चार घंटे तक चली इस लंबी चर्चा में कई प्रमुख मांगों पर सहमति बन गई है, जिसके चलते हड़ताल टाल दी गई है।
त्योहारी सीजन और यात्रियों की दुश्वारियों को देख लिया फैसला
संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने बताया कि दीपावली और भैयादूज जैसे बड़े त्योहारों के इस नाजुक दौर में यदि चक्का जाम होता, तो आम जनता को भारी फजीहत का सामना करना पड़ता। यात्रियों की इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए यूनियनों ने फिलहाल हड़ताल को टालने का परिपक्व कदम उठाया है। हालांकि, कर्मचारियों के कई अहम मुद्दों पर चर्चा अभी बाकी है, जिसके लिए आगामी 25 नवंबर को परिवहन मंत्री अनिल विज के साथ दोबारा उच्चस्तरीय बैठक तय की गई है।
बैठक में इन प्रमुख मांगों पर बनी सहमति
परिवहन विभाग के कमिश्नर अतुल द्विवेदी और डीजी निखिल गजराज की मौजूदगी में हुई इस बैठक में कर्मचारियों को कई मोर्चों पर राहत दी गई है:
प्रमोशन का रास्ता साफ: विभाग ने लगभग 750 परिचालकों (कंडक्टरों) को सब-इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नत (प्रमोट) करने पर सहमति जता दी है।
हड़ताल के दिन अब हाजिरी में जुड़ेंगे: पिछली हड़तालों के दौरान जो दिन कर्मचारियों के लिए अवकाश या अनुपस्थिति माने गए थे, उन्हें अब ड्यूटी यानी ‘प्रजेंट’ माना जाएगा।
वीकली ऑफ और अन्य छुट्टियां: कर्मचारियों को उनके नियमित साप्ताहिक अवकाश के अलावा विभाग द्वारा निर्धारित अन्य छुट्टियां भी सुचारू रूप से मिलती रहेंगी।
कंडक्टरों की जिम्मेदारी पर राहत: सफर के दौरान अगर कोई बाहरी या बिना टिकट यात्री बस में पकड़ा जाता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी अकेले कंडक्टर की नहीं होगी।
अभी इन मुद्दों पर पेंच बरकरार
भले ही कई मांगों पर सहमति बन गई हो, लेकिन कुछ बड़े मुद्दों पर अभी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। कर्मचारी लंबे समय से 2015 से लेकर अब तक का रुका हुआ दिवाली बोनस देने की मांग कर रहे हैं, जिस पर फिलहाल सहमति नहीं बन पाई है। इसके अलावा, कर्मचारियों को तीन अतिरिक्त इंक्रीमेंट देने की मांग भी अभी पेंडिंग है। इन सभी लंबित विषयों पर अब 25 नवंबर को होने वाली बैठक में विस्तृत चर्चा की जाएगी।
12 यूनियनों को भेजा गया था बुलावा
इससे पहले परिवहन विभाग ने राज्य की सभी 12 मान्यता प्राप्त यूनियनों को आधिकारिक पत्र भेजकर बातचीत के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि 3 नवंबर को बुलाई गई पहली बैठक में यूनियन प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए थे, लेकिन बुधवार को सभी ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए मीटिंग में हिस्सा लिया और अपनी बात रखी।
बता दें कि इससे पहले बिजली कर्मचारियों ने भी 22 अक्टूबर से तीन दिन की हड़ताल शुरू की थी, जिसके बाद सरकार को महज 45 घंटों के भीतर बैकफुट पर आकर निजी कंपनियों को पावर सप्लाई का पैरेलल लाइसेंस देने का फैसला वापस लेना पड़ा था। बहरहाल, रोडवेज कर्मचारियों के इस फैसले से त्योहारी सीजन में सफर करने वाले लाखों यात्रियों ने राहत की सांस ली है।
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