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Pehowa News: कुरुक्षेत्र के संगमेश्वर महादेव मंदिर में महाकाल तर्ज पर ऑनलाइन पूजा बुकिंग शुरू, 20 दिन की वेटिंग

Pehowa News: कुरुक्षेत्र के संगमेश्वर महादेव मंदिर में महाकाल तर्ज पर ऑनलाइन पूजा बुकिंग शुरू, 20 दिन की वेटिंग

कुरुक्षेत्र के संगमेश्वर महादेव मंदिर में महाकाल तर्ज पर ऑनलाइन पूजा बुकिंग शुरू

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GGaganpreet Kaur

Pehowa News: धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के पिहोवा स्थित प्रसिद्ध संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय ने श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए बड़ा कदम उठाया है। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर की तर्ज पर अब संगमेश्वर धाम में भी निशुल्क ऑनलाइन पूजा बुकिंग की डिजिटल व्यवस्था लागू कर दी गई है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, बिना किसी शुल्क के श्रद्धालुओं को मनपसंद पुजारी से ऑनलाइन पूजा बुक करने की सुविधा देने वाला यह हरियाणा का पहला मंदिर बन गया है।

श्रावण मास की शुरुआत से पहले ही इस नई सुविधा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। अब तक 1 लाख से अधिक भक्त ऑनलाइन स्लॉट बुक कर चुके हैं, जिसके कारण अब पूजा कराने के लिए 20 दिन से अधिक की वेटिंग लिस्ट चल रही है।

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लंबी लाइनों और समय की बर्बादी से मिलेगी मुक्ति

अब से पहले श्रद्धालुओं को संगमेश्वर महादेव के दर्शन और विशेष पूजा-अर्चना के लिए मंदिर परिसर में घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ता था। कई बार तो पूजा का नंबर आने में पूरा दिन निकल जाता था।

नई ऑनलाइन व्यवस्था के लागू होने से भक्तों का समय बचेगा। अब श्रद्धालु अपनी तय तिथि और समय से महज दो घंटे पहले मंदिर परिसर पहुंचेंगे और बिना किसी धक्का-मुक्की के सुगमता से पूजा-अर्चना कर सकेंगे। संगमेश्वर सेवा दल का एक प्रतिनिधि खुद श्रद्धालु के साथ रहकर पूजा सामग्री उपलब्ध कराने में सहयोग करेगा।

4 तरह की पूजा की ऑनलाइन सुविधा, वेबसाइट पर ऐसे करें बुक

मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट (www.sangameshwardham.com) के जरिए श्रद्धालु बेलपत्र पूजा, श्रृंगार पूजा, रुद्राभिषेक और अखंड रुद्राभिषेक की बुकिंग कर सकते हैं। पोर्टल पर जाकर ‘श्रावण मास पूजा’ विकल्प चुनने के बाद एक डिजिटल फॉर्म खुलता है। इसमें श्रद्धालु अपना नाम, फोन नंबर और मंदिर की सूची में शामिल मनपसंद ब्राह्मण का चयन कर तारीख और समय तय कर सकते हैं।

इसके अलावा, नागपंचमी पर होने वाली विशेष कालसर्प दोष पूजा की बुकिंग मंदिर के पंडितों द्वारा ही की जाएगी। मंदिर की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रत्येक त्रयोदशी को आयोजित होने वाले भंडारे की एडवांस बुकिंग वर्ष 2027 तक पूरी तरह पैक हो चुकी है।

13 अगस्त को स्थापित होंगे 12 ज्योतिर्लिंगों के दिव्य स्वरूप

सरस्वती और अरुणा नदी के पवित्र संगम पर स्थित इस प्राचीन धाम से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं हैं। मंदिर के सचिव महंत विश्वनाथ गिरी ने बताया कि आगामी 13 अगस्त को परिसर में 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की जाएगी।

विशेष बात यह है कि स्थापित किए जाने वाले ये सभी ज्योतिर्लिंग देश के मूल 12 ज्योतिर्लिंगों के स्पर्श (टच) से शुद्ध किए गए हैं और इनका आकार व स्वरूप भी मूल ज्योतिर्लिंगों जैसा ही रखा गया है।

त्रेतायुगीन है मंदिर का इतिहास और अद्भुत मान्यताएं

मान्यता है कि प्राचीन काल में झाड़ियों और दीमक के ढेर के बीच महात्मा गणेश गिरि को यह दिव्य शिवलिंग मिला था। त्रेतायुग में लंका विजय से पूर्व भगवान श्रीराम द्वारा बालू से निर्मित पार्थेश्वर शिवलिंग की पूजा से भी इस स्थल का संबंध जोड़ा जाता है।

मंदिर से कई रहस्यमयी और लोक मान्यताएं भी जुड़ी हैं। कहा जाता है कि मंदिर परिसर के भीतर दूध को बिलोकर मक्खन नहीं निकाला जा सकता, ऐसा प्रयास करने पर दूध खराब हो जाता है। साथ ही परिसर में खाट या चारपाई का प्रयोग वर्जित है। अखाड़ा परिषद के श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी द्वारा संचालित इस धाम में श्रावण के हर सोमवार को महादेव का अद्भुत अलौकिक श्रृंगार किया जाता है।

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