PGI Chandigarh Case Rohtak: देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शुमार पीजीआई चंडीगढ़ एक बार फिर विवादों के घेरे में है। रोहतक की गीता कॉलोनी से ताल्लुक रखने वाली कोमल और उनके पति लक्की वर्मा ने संस्थान के डॉक्टरों पर डिलीवरी के बाद बच्चा बदलने और लापरवाही के चलते नवजात की जान जाने का सीधा आरोप लगाया है। 21 अगस्त को हुई बच्चे की मौत के बाद से ही गुस्साए परिजनों ने शव को लेने से साफ इनकार कर दिया है और निष्पक्ष पुलिस कार्रवाई की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है।
कागजों में लिखा लड़का, हाथ में थमा दी लड़की
पीड़ित परिवार के मुताबिक, 6 महीने की गर्भवती कोमल को पेट में दर्द की शिकायत के बाद 18 अगस्त को पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने समय से पहले एक बच्चे को जन्म दिया।
नवजात के जन्म के तुरंत बाद डॉक्टरों द्वारा परिजनों को थमाए गए मेडिकल पेपर्स में जेंडर के आगे ‘मेल’ दर्ज किया गया था। आरोप है कि कुछ ही देर बाद जब नवजात परिजनों को सौंपा गया, तो वह फीमेल थी। इतना ही नहीं, डिलीवरी के महज 8 घंटे बाद बेड की कमी का हवाला देकर डॉक्टरों ने बच्चे को किसी निजी अस्पताल के आईसीयू में ले जाने की सलाह दे डाली।
निजी अस्पताल में खुला राज, आनन-फानन में वापस बुलाया गया बच्चा
परिजन 18 अगस्त की देर रात नवजात को चंडीगढ़ से लगभग 40 किलोमीटर दूर मिरंडा स्थित एक प्राइवेट अस्पताल ले गए। वहां 19 अगस्त की दोपहर डॉक्टरों ने जांच के बाद परिजनों को बताया कि नवजात मेल नहीं बल्कि फीमेल है।
यह सुनते ही प्रसूता कोमल बदहवास हो गई। परिजन जब यह शिकायत लेकर दोबारा पीजीआई पहुंचे, तो वहां हड़कंप मच गया। डॉक्टरों ने अपनी गलती छिपाने के लिए न सिर्फ एंबुलेंस का किराया दिया, बल्कि बच्चे का मुफ्त इलाज और मां को प्राइवेट रूम देने का लालच देकर बच्चे को 20 अगस्त को दोबारा पीजीआई में भर्ती कर लिया।
21 अगस्त को मौत से गहराया रहस्य, पुलिस और डायरेक्टर से शिकायत
दवाइयों और इलाज के इस घटनाक्रम के बीच 21 अगस्त को नवजात की सांसें थम गईं। पिता लक्की वर्मा का सीधा आरोप है कि डॉक्टरों ने अपनी गर्दन फंसती देख और मामले को दबाने की नीयत से बच्चे की जान ली है।
जब परिजनों ने कागजी सबूतों पर सवाल उठाया तो डॉक्टरों ने सफाई दी कि 6 महीने के प्री-मैच्योर बच्चे में जेंडर की पहचान सही से नहीं हो पाती। फिलहाल, परिजनों ने शव को डेड हाउस में रखवाकर पीजीआई के डायरेक्टर और स्थानीय पुलिस थाने में लिखित शिकायत दे दी है। पीड़ित परिवार अब दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग पर अड़ा है।
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