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पेपर लीक रोकने के लिए वार्षिक परीक्षा कैलेंडर बने, छात्रों पर बलप्रयोग की न्यायिक जांच हो: खरगे

पेपर लीक रोकने के लिए वार्षिक परीक्षा कैलेंडर बने, छात्रों पर बलप्रयोग की न्यायिक जांच हो: खरगे

नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे

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VVinita Kohli

political Update: राज्यसभा में बृहस्पतिवार को नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रश्न पत्र लीक मामलों को रोकने के लिए सरकार द्वारा लाये गये विधेयक के भविष्य में कारगर होने पर आशंका जताते हुए एक समयबद्ध वार्षिक परीक्षा कैलेंडर बनाये जाने का सुझाव दिया तथा हाल में हुए छात्र आंदोलन में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई ज्यादतियों की न्यायिक जांच कराने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर उच्च सदन में चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि सरकार ने इस विधेयक में कड़े प्रावधान किये हैं किंतु उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि फर्क इससे पड़ेगा कि आप परीक्षाएं कैसे कराते हैं और प्रश्न पत्र लीक होने से कैसे रोक पाते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार से सवाल किया कि वह इस समय जो काम कर रही है उसने दो साल पहले मूल कानून बनाते समय ही इस काम को क्यों नहीं किया? उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने युवाओं के मामले को उठाते हुए इस कानून की खामियों को उजागर किया था।

खरगे ने कहा कि यह विधेयक अभी भी अधूरा है तथा इससे प्रश्न पत्र लीक होने को नहीं रोका जा सकेगा। उन्होंने कहा कि आजकल जो माहौल चल रहा है, उसे ठंडा करने के लिए यह विधेयक लाया गया है। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी सड़कों पर उतरे, उन्हें शांत कराने के लिए यह विधेयक लाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों के आगे घुटने टेकने पड़े तथा प्रधानमंत्री को (शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र) प्रधान को हटाना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि सरकार को अपनी सत्ता जाने का डर सताने लगा, इसलिए यह काम किया गया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रश्न पत्र लीक होने के मामले में जो प्रदर्शन किया, उससे सरकार डर गयी और इसीलिए उसने प्रधान से इस्तीफा लेने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी कुर्सी (को बचाने) के लिए यह सब किया।

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उन्होंने इस मामले में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा इस मामले में कुछ भी नहीं कहे जाने पर प्रश्न उठाये। उन्होंने प्रश्न किया कि गृह मंत्री चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? उन्होंने सरकार को आगाह किया कि छात्रों ने सरकार को जो सबक सिखाया है, उससे कई गुना बड़ा सबक वे फिर सिखा सकते हैं। खरगे ने दावा किया कि छात्र आंदोलन के समय करीब 50 छात्र घायल हो गये जिनमें से कुछ की स्थिति नाजुक है और कुछ को पैलेट गन के छर्रे लगे हैं। उन्होंने कहा कि जो छात्र घायल हुए, उनकी चोटों के लिए जिम्मेदार गृह मंत्री हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने सदन में शाह के नहीं आने पर सवाल उठाते हुए कहा कि कहा कि गृह मंत्री कमरे में छिप नहीं सकते। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन के दौरान छात्रों एवं महिलाओं पर हुई ज्यादतियों की न्यायिक जांच करायी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को देश के छात्रों को संबोधित करने के लिए कोई और समय नहीं मिला जो उन्होंने रात बारह बजे इंस्टाग्राम पर आकर उन्हें संबोधित किया।

खरगे ने सरकार से जानना चाहा कि लाठीचार्ज, आंसू गैस का उपयोग और पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था? उन्होंने जानना चाहा कि छात्रों को पीटने वाले सादे कपड़े पहनकर आये लोग कौन थे? उन्होंने कहा कि यदि गृह मंत्री इन सवालों का जवाब नहीं दे सकते तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री के पद से जब इस्तीफा देने के बाद प्रधान संसद परिसर में पहुंचे तो सत्ता पक्ष ने उनका ऐसे स्वागत किया, मानों वह कारगिल युद्ध जीत कर आये हों। खरगे ने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार नाकामियों का भी उत्सव मनाती है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि संस्थान नहीं बदले गये, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) वही रही, परीक्षा वैसे ही ली जाती रहेगी तो हो सकता है कि कुछ ही महीनों बाद संसद में फिर ऐसा कानून लाना पड़े। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि देश भर में जब प्रश्न पत्र लीक की इतनी घटनाएं हो रही थीं तो उनकी खुफिया एजेंसियां क्या कर रही थीं? उन्होंने कहा कि प्रश्न पत्र लीक मामले में जो लोग पकड़े गये हैं, उनमें से आज तक किसी को सजा नहीं मिल पायी है।

खरगे ने सुझाव दिया कि परीक्षाओं के लिए समयबद्ध वार्षिक कैलेंडर बनाया जाए जिससे सरकार की जवाबदेही तय होगी। उन्होंने कहा कि देश में दस लाख शिक्षकों के पद जब खाली पड़े हों तो बच्चों को अच्छी शिक्षा कैसे दी जा सकती है। उन्होंने देश के शिक्षण संस्थानों में आरएसएस की विचारधारा वाले लोगों को रखने का आरोप लगाया। खरगे ने अपनी बात कहने के दौरान मनुस्मृति के कुछ अंश का हिंदी में अनुवाद पढ़ा जिसका सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ा विरोध किया और सदन में शोरगुल शुरू हो गया। सदन के नेता जे पी नड्डा ने कहा कि खरगे ने जो कहा, उससे समाज में विद्वेष का माहौल पैदा होता है और उस अंश को सदन की कार्यवाही से निकाला जाए। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि मनु स्मृति का यह विवादास्पद अंश असंधिग्ध है। बाद में सभापति ने कहा कि चूंकि इस अंश को प्रमाणित नहीं किया जा सकता अत: इसे सदन की कार्यवाही से निकाला जा रहा है। खरगे ने सरकार से राष्ट्रीय युवा रोजगार रणनीति बनाने की भी मांग की।

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