Punjab Monsoon Withdrawal : पंजाब-चंडीगढ़ में मानसून की विदाई, धूप दिखा रही असर
पंजाब-चंडीगढ़ में मानसून की विदाई, धूप दिखा रही असर
Punjab Monsoon Withdrawal : पंजाब के आसमान से मानसूनी बादलों के लौटने का वक्त आ गया है। राज्य के ज्यादातर हिस्सों से मानसून अब रुखसत हो चुका है और मौसम धीरे-धीरे शुष्क होने लगा है। मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मानसून की वापसी रेखा गुरदासपुर और चंडीगढ़ के ऊपर से गुजर रही थी, जिसके बाद से ही हवा का रुख बदलने लगा है।
हालांकि, मानसून की विदाई का मतलब यह नहीं है कि बारिश के आसार पूरी तरह खत्म हो गए हैं, क्योंकि स्थानीय मौसम प्रणालियां अभी भी सक्रिय बनी हुई हैं।
दिन चढ़ने के साथ ही अब तीखी धूप अपना असर दिखाने लगी है। दोपहर के वक्त चुभने वाली गर्मी ने आम जनजीवन को हल्का प्रभावित करना शुरू कर दिया है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के औसत तापमान में लगभग 0.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे पारा एक बार फिर सामान्य के करीब पहुंच गया है।
बुधवार को बठिंडा में सबसे ज्यादा गर्मी महसूस की गई, जहां अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम जानकारों का मानना है कि इस बीच दिन और रात की अवधि में भी बदलाव आ रहा है, और आने वाले दिनों में रातें लंबी व दिन छोटे होने लगेंगे।
नया पश्चिमी विक्षोभ और बारिश की हल्की उम्मीद
दक्षिण भारत में सक्रिय हुए मौसम तंत्र का असर उत्तर-पश्चिम भारत तक पहुंच सकता है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों को पार करने वाला डीप डिप्रेशन अब मैदानी इलाकों की तरफ बढ़ रहा है। इसी मौसमी हलचल के चलते 26 से 28 सितंबर के बीच पंजाब के कुछ चुनिंदा इलाकों में हल्की बूंदाबांदी या छिटपुट बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसूनी दौर कमजोर जरूर पड़ा है, लेकिन स्थानीय बादलों की आवाजाही से तापमान में राहत मिल सकती है।
बांधों में पानी की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित
कृषि प्रधान राज्य के लिए सबसे राहत की खबर बांधों के जलस्तर को लेकर है। लगातार बदलते मौसम के बीच पंजाब के मुख्य जलाशयों में स्थिति पूरी तरह सुरक्षित है। भाखड़ा बांध का जलस्तर 1642.2 फीट दर्ज किया गया है, जहां पानी की आवक 17,628 क्यूसेक और निकासी 27,613 क्यूसेक चल रही है।
इसी तरह पोंग बांध का जलस्तर 1370.1 फीट रिकॉर्ड किया गया है, जिसमें 6,250 क्यूसेक पानी आ रहा है और 16,654 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। राहत की बात यह है कि दोनों ही बड़े बांधों में जलस्तर तय डेंजर लेवल से काफी नीचे है, जिससे किसी भी तरह के खतरे की कोई आशंका नहीं है।
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