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निजी अस्पताल संचालकों को निर्देश, सड़क हादसे में घायल का तुरंत शुरू करें उपचार, हिट एंड रन मामले में पीड़ित परिवार को मिलती है दो लाख की आर्थिक सहायता

निजी अस्पताल संचालकों को निर्देश, सड़क हादसे में घायल का तुरंत शुरू करें उपचार, हिट एंड रन मामले में पीड़ित परिवार को मिलती है दो लाख की आर्थिक सहायता
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ddharm narain

Narnaul News:

सड़क हादसे में हर सेकंड कीमती होता है और अक्सर पैसों की कमी या पहचान न हो पाने के कारण घायल को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे कई बार जान भी जा सकती है। इसी समस्या के समाधान के लिए हरियाणा सरकार ने सड़क हादसा पीड़ितों के लिए विशेष योजनाएं चला रखी है। इन्हीं योजनाओं को जिले में प्रभावी ढंग से लागू करने के मकसद से बुधवार को लघु सचिवालय में उपायुक्त अनुपमा अंजली की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। इसमें इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सदस्यों, निजी अस्पताल संचालकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया।
 इस बैठक में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार योजना और अज्ञात वाहन क्षतिपूर्ति योजना (हिट एंड रन) 2022 पर चर्चा हुई।
डीसी ने बताया कि कैशलेस उपचार योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को दुर्घटना की तिथि से 7 दिनों तक अधिकतम डेढ़ लाख रुपए तक का इलाज नजदीकी अस्पताल में पूरी तरह नि:शुल्क मिलता है। इसके बाद अगर इलाज जारी रखना पड़े तो आगे का खर्च घायल के परिजनों को स्वयं वहन करना होगा।
वहीं अज्ञात वाहन क्षतिपूर्ति योजना (हिट एंड रन) 2022 खासतौर पर उन मामलों के लिए बनाई गई है जहां वाहन चालक हादसा करके मौके से फरार हो जाता है और उसकी पहचान नहीं हो पाती, ऐसे मामलों में पीड़ित की मृत्यु होने पर परिजनों को 2 लाख रुपए तथा गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में 50 हजार रुपए तक का मुआवजा सरकार की ओर से दिया जाता है।
उपायुक्त ने बताया कि यह जिला स्तरीय कमेटी केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देशों के अनुपालन में गठित की गई है।
बैठक में उपायुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन योजनाओं का लाभ हर हादसा पीड़ित को समय रहते मिलना चाहिए ताकि किसी की जान बचाई जा सके।
उन्होंने कहा कि प्रशासन व सरकार के लिए एक-एक इंसान की जिंदगी अनमोल है और कोई भी गरीब व्यक्ति इलाज के अभाव में सड़क हादसे में दम न तोड़े, इसी उद्देश्य से यह व्यवस्था बनाई गई है।
उन्होंने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सदस्यों और निजी अस्पताल संचालकों को भी निर्देश दिए कि वे इन योजनाओं को हर हाल में पूरी गंभीरता से लागू करें, ताकि दुर्घटना के तुरंत बाद के अहम समय में ही घायलों का उपचार शुरू हो सके।
सड़क हादसा होने पर आम आदमी, अस्पताल संचालक और पुलिस की ये है जिम्मेदारी
पहला कदम -:
अगर किसी को सड़क हादसा होते हुए दिखे या हादसे के तुरंत बाद कोई घायल मिले, तो सबसे पहले 112 नंबर पर कॉल करके सूचना दें। यह हरियाणा पुलिस की इमरजेंसी हेल्पलाइन है और इसी नंबर से एम्बुलेंस व पुलिस दोनों को सूचना पहुंच जाती है। कॉल करने वाले को अपनी पहचान बताने की कोई बाध्यता नहीं है और न ही किसी कानूनी कार्रवाई में फंसने का डर रखना चाहिए—गुड सेमेरिटन कानून के तहत मदद करने वाले व्यक्ति को पूरी सुरक्षा मिली हुई है।
दूसरा कदम -:
सूचना मिलते ही एम्बुलेंस या पुलिस मौके पर पहुंचकर घायल को नजदीकी पंजीकृत अस्पताल तक पहुंचाती है। अगर कोई आम नागरिक खुद अपने वाहन से घायल को अस्पताल ले जाता है, तब भी उसे कैशलेस योजना का लाभ मिलता है, बशर्ते पुलिस को हादसे की सूचना दी गई हो।
तीसरा कदम -:
मौके पर पहुंचकर पुलिस हादसे का ब्योरा ई-डार (इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट) नाम के ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज करती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर तय होता है कि पीड़ित योजना का पात्र है या नहीं। पुलिस को यह सूचना दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर दर्ज करनी होती है।
चौथा कदम -:
अस्पताल पहुंचते ही घायल का इलाज तुरंत शुरू कर दिया जाता है—इलाज शुरू करने के लिए अस्पताल पहले पैसे नहीं मांग सकता। गैर-जानलेवा मामलों में 24 घंटे तक और जानलेवा मामलों में 48 घंटे तक स्थिरीकरण (स्टेबलाइजेशन) उपचार अनिवार्य रूप से दिया जाता है।
पांचवां कदम -:
अस्पताल इलाज, खर्च और दावे की पूरी जानकारी नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के टीएमएस 2.0 पोर्टल पर अपलोड करता है। यहीं से अस्पताल को सरकार से सीधे भुगतान मिल जाता है, इसलिए मरीज या परिजनों को अस्पताल में पैसे जमा कराने की जरूरत नहीं पड़ती (7 दिन/डेढ़ लाख रुपए की सीमा तक)।
छठा कदम -:
अगर वाहन चालक फरार हो गया हो और उसकी पहचान न हो सके, तो पीड़ित या परिजन घटना के 6 महीने के भीतर संबंधित एसडीएम या जिलाधिकारी कार्यालय में मुआवजे के लिए निर्धारित फॉर्म जमा कर सकते हैं। पुलिस की प्राथमिकी (एफआईआर) की कॉपी इसमें अहम दस्तावेज होती है।
सातवां कदम -: मुआवजे का भुगतान
जिला स्तरीय कमेटी मामले की जांच के बाद मृत्यु होने पर 2 लाख रुपए और गंभीर घायल होने पर 50 हजार रुपए की राशि सीधे पीड़ित/परिजनों के बैंक खाते में ट्रांसफर करती है।
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