Rewari News: जिले में आरटीआई (सूचना का अधिकार) के तहत मांगी गई जानकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध नहीं कराने के गंभीर मामले में हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने धारूहेड़ा के दो तत्कालीन एसपीआईओ-सह-ब्लॉक विकास एवं पंचायत अधिकारियों (बीडीपीओ) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने लापरवाही बरतने पर बीडीपीओ वीरेंद्र और विशाल भारद्वाज पर 25-25 हजार रुपए का आर्थिक जुर्माना लगाया है।
यह पूरा मामला गांव डुंगरवास निवासी और शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त सुपरीटेंडेंट चंद्र प्रकाश द्वारा 11 फरवरी 2020 को दायर की गई एक आरटीआई आवेदन से जुड़ा हुआ है। आवेदन के संदर्भ में निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जानकारी नहीं मिलने के कारण यह मामला दूसरी अपील के रूप में आयोग तक पहुंचा था।
मामले की सुनवाई के दौरान रिकॉर्ड की जांच में यह बात सामने आई कि बीडीपीओ वीरेंद्र का कार्यकाल 15 नवंबर 2019 से 16 अप्रैल 2020 तक और विशाल भारद्वाज का कार्यकाल 17 अप्रैल 2020 से 9 नवंबर 2020 तक रहा था। दोनों ही अधिकारी तय 30 दिन की वैधानिक समयसीमा में आवेदक को सूचना उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल रहे। आयोग के हस्तक्षेप और कड़े निर्देशों के बाद करीब छह साल के लंबे अंतराल के बाद आवेदक को जानकारी मुहैया कराई जा सकी। अधिकारियों की ओर से इस भारी देरी के लिए कोई भी ठोस और कानूनी रूप से मान्य कारण पेश नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े आवेदक चंद्र प्रकाश ने जानकारी मिलने की पुष्टि तो की, लेकिन उसे अधूरा बताते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की। वहीं, सरपंच विपिन कुमार और ग्राम सचिव दिनेश कुमार ने आयोग को बताया कि अंतरिम आदेश के पालन में आवेदक ने 2 सितंबर 2026 को रिकॉर्ड का निरीक्षण कर वांछित जानकारी प्राप्त कर ली है, जिसके बाद उन्होंने मामला बंद करने का अनुरोध किया।
आयोग ने आरटीआई अधिनियम, 2006 की धारा 20(1) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि तय अवधि में सूचना न देने और उचित कारण न बताने पर जन सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाया जा सकता है। आदेश में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले का भी जिक्र किया गया है।
आयोग ने निर्देश दिए हैं कि जुर्माने की यह राशि आदेश मिलने के तीन महीने के भीतर सरकारी मद में जमा कराई जाए। विकास एवं पंचायत विभाग, चंडीगढ़ के निदेशक को निर्देश दिए गए हैं कि वे संबंधित अधिकारियों से राशि की वसूली सुनिश्चित करें। यदि कोई अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुका है, तो नियमानुसार यह राशि उसकी पेंशन से काटी जाएगी। इसके अलावा, विभाग को देरी के कारणों की जांच कर दोषी पाए जाने वाले अन्य कर्मचारियों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
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