Sirsa DAP Crisis: हरियाणा के सबसे बड़े कृषि प्रधान जिले सिरसा में सरसों की बुवाई सिर पर है, लेकिन खेत तैयार खड़े किसानों को डीएपी खाद का एक कट्टा तक मयस्सर नहीं हो रहा है। बुधवार सुबह से ही मंडी परिसर में बने किसान रेस्ट हाउस के बाहर सैकड़ों किसानों का हुजूम उमड़ पड़ा। (Sirsa Anaj Mandi DAP Crisis) कभी किसान घंटों कतारों में खड़े रहते हैं, तो थक-हारकर जमीन पर बैठ जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो उन्हें टोकन मिल पा रहे हैं और न ही खाद। गौरतलब है कि इससे पहले भी सोमवार और मंगलवार को खाद की किल्लत से खफा किसानों ने सड़कों पर उतरकर चक्का जाम किया था।
बुवाई का समय निकला जा रहा, सिफारिशी लोगों को खाद देने पर अधिकारियों पर उठे सवाल
मंडी में कतार में लगे किसानों का दर्द छलक रहा है। किसानों का कहना है कि उन्होंने खेतों की सिंचाई कर जुताई पूरी कर ली है और अब सरसों की बिजाई का एकदम सही समय है। अगर दो-चार दिनों के भीतर डीएपी नहीं मिली, तो जमीन की नमी सूख जाएगी और पूरी मेहनत पर पानी फिर जाएगा।
किसानों ने विभागीय अधिकारियों पर सांठगांठ और सिफारिशी लोगों को बिना लाइन टोकन बांटने के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके चलते लाइन में खड़े किसानों के बीच आपस में तीखी झड़पें भी हो रही हैं। हालांकि, तपती धूप को देखते हुए मार्केट कमेटी ने तंबू जरूर लगाया है, लेकिन खाद न मिलने से किसानों का गुस्सा भड़का हुआ है।
दो महीने से खाली पड़ा है DDA का पद, फतेहाबाद के भरोसे चल रहा सिरसा का कृषि विभाग
जिले में खाद वितरण की इस भारी अव्यवस्था के पीछे प्रशासनिक ढिलाई को बड़ा कारण माना जा रहा है। सिरसा में पिछले दो महीनों से उप कृषि निदेशक (डीडीए) का पद खाली पड़ा है और फतेहाबाद के डीडीए को सिरसा का अतिरिक्त प्रभार थमाया गया है। (Farmers Protest Sirsa) दो बड़े जिलों की जिम्मेदारी एक ही अधिकारी पर होने के कारण विभागीय कामकाज और निगरानी व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ गई है। भारतीय किसान एकता (बीकेई) ने इस मुद्दे पर कड़ा संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है।
किसान संगठन ने दी चेतावनी: पक्की नियुक्ति नहीं हुई तो सड़कों पर उतरेंगे
भारतीय किसान एकता के प्रदेशाध्यक्ष लखविंद्र सिंह औलख ने साफ कहा कि सिरसा प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है, जो राज्य की कुल कृषि भूमि का लगभग 10 फीसदी हिस्सा समेटे हुए है।
इतने महत्वपूर्ण जिले को रामभरोसे छोड़ना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। (Haryana Agriculture) बीकेई के प्रदेश महासचिव अंग्रेज सिंह कोटली, मनजीत सिंह भदोल और जगदेव सिंह रघुआणा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तुरंत सिरसा में स्थायी डीडीए की नियुक्ति नहीं की और खाद की आपूर्ति सुचारू नहीं बनाई, तो संगठन को मजबूरन बड़े स्तर पर जन-आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा।

