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Gurugram News: ‘डेथ’ या ‘फ्रैक्चर’ की पर्ची उठाकर दी कस्टडी में यातना, गुरुग्राम पुलिस की बर्बरता पर HHRC का बड़ा एक्शन

Gurugram News: 'डेथ' या 'फ्रैक्चर' की पर्ची उठाकर दी कस्टडी में यातना, गुरुग्राम पुलिस की बर्बरता पर HHRC का बड़ा एक्शन

‘डेथ’ या ‘फ्रैक्चर’ की पर्ची उठाकर दी कस्टडी में यातना, गुरुग्राम पुलिस की बर्बरता पर HHRC का बड़ा एक्शन

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AAmandeep Singh

Gurugram News: हरियाणा के गुरुग्राम अंतर्गत सोहना क्षेत्र से पुलिस कस्टडी में बर्बरता और कस्टोडियल वायलेंस का एक ऐसा दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने राज्य पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीआईए (CIA) पुलिस हिरासत के दौरान एक आरोपी के साथ कथित तौर पर मारपीट करने और क्रूरता से उसकी टांग तोड़ देने के आरोपों पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग (HHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है।

आयोग ने मामले का स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) को स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) रैंक से कम के अधिकारी से न कराई जाए।

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चेयरपर्सन जस्टिस ललित बत्रा का सख्त रुख

मानवाधिकार आयोग के चेयरपर्सन जस्टिस ललित बत्रा ने मामले की सुनवाई के दौरान बेहद सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि न्यायिक आदेश में दर्ज ये आरोप स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच में सच पाए जाते हैं, तो इसे कस्टोडियल हिंसा, सत्ता के भयानक दुरुपयोग और देश में ‘कानून के शासन’ पर बहुत बड़ा हमला माना जाएगा।

उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि पुलिस हिरासत सिर्फ और सिर्फ पूछताछ का एक कानूनी माध्यम हो सकती है, लेकिन किसी भी नागरिक को यातना देने, क्रूरता बरतने या अमानवीय व्यवहार करने का लाइसेंस पुलिस के पास बिल्कुल नहीं है।

फ्लाईओवर से गिरने की थ्योरी और ‘पर्ची’ से यातना का खौफनाक सच

पूरा मामला तब उजागर हुआ जब 30 जून 2026 को सोहना के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) की अदालत में आरोपी को पेश किया जाना था। पुलिस ने कागजों में दावा किया था कि बरामदगी के दौरान भागने की कोशिश में आरोपी फ्लाईओवर से नीचे गिर गया, जिससे उसका पैर टूट गया। हालांकि, जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हुई, तो आरोपी ने रो-रोकर पूरी कहानी बयां की।

उसने बताया कि वह गिरा नहीं था, बल्कि सोहना सीआईए परिसर में पुलिसकर्मियों ने उसकी आंखों पर पट्टी बांधकर, पैर को दो ईंटों के बीच रखा और भारी चीज से वार कर उसकी टांग तोड़ दी।

अस्पताल पहुंचे मजिस्ट्रेट, आरोपी ने बताई ‘डेथ-फ्रैक्चर’ वाली पर्चियों की कहानी

आरोपों की भयावहता को देखते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अदालती समय खत्म होने के बाद खुद गुरुग्राम सिविल अस्पताल जाकर पुलिसकर्मियों को बाहर कर आरोपी का एकांत में बयान दर्ज किया।

आरोपी के मुताबिक, 29 जून की शाम को सीआईए थाने में उसे चार पर्चियां उठाने को दी गईं, जिन पर कथित तौर पर “डेथ”, “फ्रैक्चर”, “बुलेट इंजरी” और “रिवॉर्ड मनी” लिखा था। किस्मत से उसके हाथ “LL Fracture” (लेफ्ट लेग फ्रैक्चर) की पर्ची आई और फिर उसकी आंखों पर पट्टी बांधकर यह हैवानियत की गई। इसके बाद उसे डॉक्टरों के सामने फ्लाईओवर से गिरने की झूठी कहानी बोलने के लिए धमकाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला

मानवाधिकार आयोग ने अपने कड़े आदेश में स्पष्ट किया कि महज किसी अपराध में आरोपी हो जाने से किसी भी व्यक्ति के संवैधानिक मौलिक अधिकार खत्म नहीं हो जाते। संविधान का अनुच्छेद 14, 20(3), 21 और 22 हर नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन और निष्पक्ष प्रक्रिया का अधिकार देता है।

आयोग ने डी.के. बसु, नीलाबती बेहरा और परमवीर सिंह सैनी मामलों में सुप्रीम कोर्ट की नजीरों का हवाला देते हुए पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरों के संरक्षण और पुलिस की जवाबदेही को अनिवार्य बताया है। मामले की अगली सुनवाई से ठीक एक हफ्ते पहले जांच रिपोर्ट आयोग के समक्ष पेश करनी होगी।

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