Sonipat Hospital Collapse: हरियाणा के सोनीपत जिले में पिछले कुछ दिनों से जारी मानसूनी बारिश अब सरकारी दावों और निर्माण कार्यों की पोल खोलने लगी है। खरखौदा ब्लॉक के रोहट गांव से गुरुवार दोपहर एक ऐसी खौफनाक तस्वीर सामने आई, जिसने स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के हाथ-पैर फुला दिए।
यहां स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की मुख्य इमारत का एक बड़ा हिस्सा दोपहर के वक्त अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया। गनीमत यह रही कि नियति ने साथ दिया और जिस वक्त लेंटर मलबे में तब्दील हुआ, उस वक्त कोई भी मरीज या स्वास्थ्यकर्मी उसकी जद में नहीं था। वरना, मलबे की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे किसी बड़े श्मशान का रूप ले सकती थीं।
दोपहर सवा तीन बजे मची अफरा-तफरी, कमरों के आगे लटके मलबे के छज्जे
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गुरुवार दोपहर करीब 3:20 बजे अचानक एक जोरदार आवाज हुई और देखते ही देखते 25 कमरों वाले इस अस्पताल परिसर की गैलरी और छत का भारी-भरकम हिस्सा नीचे आ गिरा। मलबे के दबाव से दफ्तर और दवाखाना पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।
हादसे के वक्त अस्पताल में एक होम्योपैथिक, एक एलोपैथिक और एक डेंटिस्ट समेत करीब 7 से 8 कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात थे। शोर सुनते ही सभी लोग खुले मैदान की तरफ भागे। स्थिति इतनी विकट है कि हर कमरे के आगे टूटा हुआ छज्जा झूल रहा है, जिससे अंदर रखा सरकारी रिकॉर्ड और कीमती दवाइयां निकालने में प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं। आनन-फानन में बिजली सप्लाई कटवाई गई और किसी तरह बायोमेट्रिक मशीन को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
महज 13 साल में ढह गई इमारत, जितेंद्र मलिक और जयवीर वाल्मीकि ने किया था उद्घाटन
इस हादसे ने सरकारी निर्माण कार्यों में होने वाले भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लगा दिया है। रिकॉर्ड के अनुसार, इस अस्पताल भवन का निर्माण साल 2013 में कराया गया था, जिसका उद्घाटन तत्कालीन सांसद जितेंद्र मलिक और तत्कालीन विधायक जयवीर वाल्मीकि ने किया था।
एक सरकारी इमारत का महज 13 साल के भीतर इस तरह खंडहर हो जाना यह बताने के लिए काफी है कि इसमें किस दर्जे की लापरवाही बरती गई। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि साल 2024 में इस बिल्डिंग के जीर्णोद्धार के लिए एस्टीमेट (प्रस्ताव) बनाकर भी भेजा गया था, लेकिन फाइलें चंडीगढ़ के दफ्तरों में धूल फांकती रहीं और नतीजा आज सबके सामने है।
ओपीडी ठप, सोनीपत सीएमओ ने दिए जांच के आदेश
रोहट का यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ इसी गांव के लिए नहीं, बल्कि आनंदपुर झरोठ, कंवाली, झरोठी, फतेहपुर, हरसाना, बैयांपुर और लहराड़ा सहित करीब 8 गांवों की लाइफलाइन है, जहां रोजाना 80 से ज्यादा गरीब मरीज अपना इलाज कराने आते हैं। इस हादसे के बाद पूरी ओपीडी व्यवस्था ठप हो गई है।
घटना की सूचना मिलते ही सोनीपत की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) स्वास्थ्य टीम के साथ मौके पर पहुंचीं और पूरे परिसर को असुरक्षित घोषित कर दिया। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि यदि यह हादसा ओपीडी के पीक आवर्स (मरीजों की भीड़ के समय) के दौरान होता, तो कई मासूमों की जान जा सकती थी। फिलहाल प्रशासन ने मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है, लेकिन सवाल वही है कि इस लापरवाही के असली गुनहगारों पर कार्रवाई कब होगी?
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