Supreme Court: दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण का मुद्दा एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए पराली जलाने के साथ वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण और स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर चिंता जताई। सुनवाई के दौरान CJI ने सवाल उठाया कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार ठहराना कितना उचित है और अमीर तथा संभ्रांत वर्ग के लोगों की गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल रहे। अदालत ने इस दौरान किसानों को पराली प्रबंधन के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने, परिवहन से होने वाले प्रदूषण और कचरा जलाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की। सुनवाई में साफ हुआ कि दिल्ली-NCR की हवा सुधारने के लिए केवल खेतों में पराली जलाने पर रोक लगाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि शहरों के भीतर प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर भी कार्रवाई जरूरी है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हल्के अंदाज में कहा, ‘हमें उम्मीद है कि आप सभी दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे।’ इस पर मामले में न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने दिल्ली की प्रदूषण स्थिति की ओर अदालत का ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी के आसपास बना हुआ है। उन्होंने स्थिति की गंभीरता बताते हुए कहा कि प्रदूषण के कारण लोगों की आवाज तक प्रभावित हो रही है और ऐसा महसूस होता है जैसे रोजाना 30 सिगरेट पी रहे हों। अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि दिल्ली में बारिश के बाद प्रदूषण के स्तर में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन इससे समस्या खत्म नहीं हुई है। उन्होंने 5 नवंबर के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि उस दिन दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान 14 प्रतिशत था।
पराली के साथ परिवहन और कचरा जलाना भी बड़ी समस्या
एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कहा कि दिल्ली पहले से ही प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है। ऐसे में पराली जलाने की घटनाएं स्थिति को और खराब कर देती हैं। हालांकि, उन्होंने परिवहन को दिल्ली-NCR में प्रदूषण की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बताया। उनके मुताबिक, प्रदूषण से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर उत्सर्जन के स्रोतों पर भी काम करना होगा। NCR में वाहनों से निकलने वाला धुआं, ऊर्जा उत्पादन और कचरा जलाने से होने वाला प्रदूषण भी प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं। इसका सीधा असर दिल्ली और आसपास के शहरों में रहने वाले लोगों पर पड़ता है। सड़क पर चलने वाले वाहन, औद्योगिक गतिविधियां, निर्माण कार्य और कचरा जलाने जैसी गतिविधियां स्थानीय हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण की योजना बनाते समय अलग-अलग स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को ध्यान में रखना जरूरी है।
किसानों को मशीनें देने भर से नहीं रुकेगी पराली जलाने की समस्या
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह किसानों के लिए अगली फसल की बुवाई का समय है। ऐसे में पराली जलाने की समस्या को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। इस पर अपराजिता सिंह ने बताया कि किसानों को पराली प्रबंधन की मशीनें उपलब्ध करा देना ही पर्याप्त नहीं है। कई किसानों के पास मशीन चलाने के लिए ईंधन खरीदने तक के पैसे नहीं होते। इसके अलावा छोटे खेतों में इन मशीनों का इस्तेमाल करना भी आसान नहीं है।
उन्होंने अदालत के सामने यह भी बताया कि किसानों को पराली के उचित प्रबंधन के लिए व्यावहारिक मदद की जरूरत है। केवल मशीन उपलब्ध कराने से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक किसानों को उसके इस्तेमाल के लिए जरूरी संसाधन और आर्थिक सहायता नहीं मिलेगी। इस दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि अधिकारियों की ओर से एक निश्चित दर पर पराली खरीदने का प्रस्ताव भी दिया गया था। इससे पराली को जलाने के बजाय उसके उपयोग और निपटान के दूसरे विकल्पों पर काम करने की संभावना बन सकती है।
अमीरों की गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण पर भी सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के आखिर में CJI सूर्यकांत ने प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार ठहराने की सोच पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि समाज के दूसरे वर्गों की भूमिका पर भी ध्यान देने की जरूरत है। खासतौर पर उन्होंने संभ्रांत और अमीर वर्ग के लोगों की गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को लेकर सवाल किया। अदालत की इस टिप्पणी का संकेत साफ था कि दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी केवल किसानों तक सीमित नहीं की जा सकती। वाहनों से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण का बड़ा स्रोत है और इस पर प्रभावी नियंत्रण के उपाय जरूरी हैं।
दिल्ली के अलावा गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद जैसे NCR के शहरों में भी बड़ी संख्या में वाहन सड़कों पर चलते हैं। ऐसे में परिवहन से होने वाले उत्सर्जन को कम करना पूरे क्षेत्र के लिए जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में सामने आए मुद्दे बताते हैं कि पराली प्रबंधन, किसानों को आर्थिक और तकनीकी सहायता, वाहनों से होने वाला प्रदूषण और कचरा जलाने जैसी समस्याओं पर एक साथ काम करने की जरूरत है। दिल्ली-NCR में रहने वाले लोगों को साफ हवा उपलब्ध कराने के लिए इन सभी स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी होगा।
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