Taj Mahal Night Glowing: दुनिया के सात अजूबों में शुमार आगरा का ताजमहल अपनी बेमिसाल नक्काशी के लिए जाना जाता है। दिन के उजाले में सफेद संगमरमर की यह इमारत जितनी भव्य दिखती है, पूर्णिमा की रात चांदनी में इसकी चमक देखकर लोग ठगे से रह जाते हैं। (Taj Mahal Night View Full Moon) लेकिन सवाल यह है कि आखिर बिना किसी इलेक्ट्रिक लाइट के चांद की रोशनी पड़ते ही ताजमहल की दीवारों से रंग-बिरंगी किरणें कैसे फूटने लगती हैं? हाल ही में एक टूर व्लॉगर ने अपने मोबाइल की टॉर्च से इस ऐतिहासिक ‘जादू’ का लाइव डेमो देकर इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो को सईद खान नाम के एक टूर व्लॉगर ने पोस्ट किया है। व्लॉगर का कहना है कि सरकार हर साल शरद पूर्णिमा के आसपास पर्यटकों को रात में ताजमहल का दीदार (नाइट व्यूइंग) करने की इजाजत देती है। जब पूरा चांद ताजमहल के ठीक ऊपर होता है, तो संगमरमर से सफेद ही नहीं, बल्कि लाल, हरे और नारंगी रंग की रहस्यमयी रोशनी निकलती है।
मोबाइल टॉर्च से दिया डेमो: दीवार में जड़े हैं रूबी, नीलम और पन्ना
इस दावे को साबित करने के लिए व्लॉगर ने दिन के उजाले में ही ताजमहल परिसर की दीवार पर अपना मोबाइल फोन सटाकर उसकी टॉर्च जला दी। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जैसे ही टॉर्च की तेज रोशनी दीवार के अलग-अलग हिस्सों पर पड़ती है, (Taj Mahal Gemstones Secret) पारदर्शी संगमरमर के भीतर जड़े रंग-बिरंगे पत्थर जगमगा उठते हैं। सफेद पत्थर से रोशनी सीधे आर-पार होती है, जबकि नारंगी, हरे और लाल पत्थरों से टकराकर रोशनी का रंग बदल जाता है।
व्लॉगर ने समझाया कि यह कोई चमत्कार या ऑप्टिकल इल्यूजन नहीं, बल्कि मुगलकालीन ‘पिएट्रा ड्यूरा’ (Pietra Dura) तकनीक और कीमती रत्नों का मेल है। ताजमहल को तराशते वक्त सफेद मकराना संगमरमर के बीच सेमी-प्रेशियस स्टोन यानी अकीक, नीलम, रूबी, जेड और पन्ना जैसे रत्न जड़े गए थे। जब चांद की रोशनी इन पर एक खास कोण से पड़ती है, तो ये रत्न प्रिज्म की तरह काम करते हैं और रोशनी को रिफ्लेक्ट करते हैं।
सोशल मीडिया पर दो फाड़ हुए यूजर्स: ताजमहल या आगरा फोर्ट?
जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, कमेंट सेक्शन में यूजर्स आपस में भिड़ गए। वीडियो को लेकर इंटरनेट दो गुटों में बंट गया है। कई लोगों ने इस जानकारी को बेहद रोचक और ज्ञानवर्धक माना, वहीं दूसरी तरफ सवालों की बौछार शुरू हो गई। बड़ी संख्या में यूजर्स का दावा है कि व्लॉगर जिस दीवार पर टॉर्च जलाकर दिखा रहा है, वह ताजमहल की नहीं बल्कि आगरा फोर्ट की ‘जहांगीरी महल’ या किसी अन्य लाल बलुआ पत्थर वाली इमारत की है।
वहीं, कुछ अनुभवी पर्यटकों ने शरद पूर्णिमा के नाइट व्यूइंग नियमों पर सवाल खड़े कर दिए। उनका कहना है कि रात के वक्त पर्यटकों को मुख्य गुंबद के इतने करीब जाने ही नहीं दिया जाता, जहां से पत्थरों की नक्काशी को छुआ जा सके। कई लोगों ने इस पूरे वीडियो को फेक और सिर्फ व्यूज बटोरने का जरिया बताया। ( Sharad Purnima Taj Mahal View) फिलहाल, दावे में कितनी सच्चाई है यह बहस का विषय है, लेकिन इस वीडियो ने एक बार फिर ताजमहल की स्थापत्य कला और उसके वैज्ञानिक पहलुओं को चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।
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