Rucking Walk Benefits: खुद को फिट रखने के लिए सुबह की सैर या जिम में पसीना बहाना आम बात है। लेकिन पिछले कुछ समय से फिटनेस एक्सपर्ट्स के बीच एक नए और अनोखे अंदाज की चर्चा है—’रकिंग वॉक’। अगर आप भी ट्रेडमिल पर दौड़ते-दौड़ते या एक ही तरह की एक्सरसाइज करते-करते बोर हो चुके हैं, तो रकिंग वॉक आपके लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकती है। देखने में यह भले ही बेहद साधारण लगे, लेकिन इसके फायदे आपको हैरान कर देंगे।
सेना के बूटकैंप से निकलकर फिटनेस ट्रेंड बनी रकिंग
रकिंग वॉक का इतिहास सैन्य बलों से जुड़ा हुआ है। सैनिक अपनी ट्रेनिंग के दौरान भारी भरकम साजो-सामान और हथियारों से लैस बैग (Ruck) को पीठ पर लादकर मीलों पैदल मार्च किया करते थे। फिटनेस की भाषा में इसी को ‘रकिंग’ कहा जाता है। अब हाइकर्स और फिटनेस प्रेमियों ने इसे अपने वर्कआउट रूटीन का हिस्सा बना लिया है। इसके लिए आपको जिम जाने की जरूरत नहीं है, बस अपने साधारण से बैग में कुछ किताबें या वजन का सामान रखना है और आप रकिंग के लिए तैयार हैं।
सेहत के लिए क्यों है यह चमत्कारी वर्कआउट?
विशेषज्ञों का मानना है कि रकिंग वॉक सामान्य पैदल चलने की तुलना में कई गुना अधिक प्रभावी है। इसके फायदों की फेरलिस्ट काफी लंबी है:
तेजी से घटती है चर्बी: पीठ पर जब अतिरिक्त वजन होता है, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है। इससे सामान्य वॉक की तुलना में काफी ज्यादा कैलोरी बर्न होती है।
स्टैमिना और कोर स्ट्रेंथ में इजाफा: कई फिटनेस स्टडीज यह दावा करती हैं कि यदि नियमित रूप से कुछ हफ्तों तक वजन के साथ वॉक की जाए, तो शरीर की सहनशक्ति और कार्डियोवैस्कुलर क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होता है।
हड्डियों को मिलती है मजबूती: वजन उठाकर चलने से हड्डियों पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे बोन डेंसिटी (हड्डियों का घनत्व) मजबूत होती है। यह उन महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो बढ़ती उम्र या मेनोपॉज के बाद कमजोर हड्डियों की समस्या से जूझती हैं।
रकिंग शुरू करने से पहले इन बातों का रखें खास ख्याल
रकिंग वॉक के फायदे बेहिसाब हैं, लेकिन जरा सी लापरवाही आपके जोड़ों और पीठ पर भारी पड़ सकती है। इसलिए मैदान में उतरने से पहले इन बातों को गांठ बांध लें:
वजन का रखें सही संतुलन: अगर आप फिटनेस की दुनिया में नए हैं, तो सीधे भारी-भरकम वजन उठाने की भूल न करें। शुरुआत में बैग में हल्की किताबें या कम वजन रखें।
क्षमता के अनुसार बढ़ाएं समय: पहले यह सुनिश्चित करें कि आप बिना वजन के कम से कम 30 मिनट तक आसानी से चल पाते हैं या नहीं। शुरुआती दिनों में वॉक का समय 15 से 20 मिनट तक ही सीमित रखें।
पोस्चर और स्ट्रेचिंग पर दें ध्यान: वॉक पर निकलने से पहले हल्के वॉर्म-अप और स्ट्रेचिंग मूवमेंट्स जरूर करें। चलते वक्त अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और गर्दन व कंधों पर पड़ने वाले दबाव पर नजर रखें ताकि कोई खिंचाव या दर्द न हो।


