Farming Tips: रबी सीजन में गेहूं की बुआई और शुरुआती देखभाल का दौर शुरू हो चुका है। अकसर किसान भाई अच्छी उपज पाने के लिए यूरिया, डीएपी और समय पर सिंचाई पर ही पूरा ध्यान केंद्रित करते हैं, लेकिन सूक्ष्म पोषक तत्वों की अनदेखी फसल पर भारी पड़ जाती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, मिट्टी में जिंक की कमी गेहूं के पौधों की बढ़त और दानों की चमक-रंगत दोनों पर बुरा असर डालती है। समय रहते ध्यान न दिया जाए तो किसान को 20 से 30 फीसदी तक का उत्पादन घाटा सहना पड़ सकता है।
देश की 40 फीसदी कृषि भूमि में जिंक का संकट
हालिया कृषि अध्ययनों से यह चिंताजनक तथ्य सामने आया है कि देश की 40 प्रतिशत से अधिक उपजाऊ जमीन में जिंक की भारी कमी हो चुकी है। जिंक दरअसल गेहूं के पौधों की जड़ों को गहराई तक मजबूत करने, नए कल्ले (फोड़) निकालने और दानों के भराव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या के वरिष्ठ प्रसार अधिकारी डॉ. केएम सिंह बताते हैं कि जिंक की कमी होने पर पौधा भोजन बनाने की अपनी प्राकृतिक प्रक्रिया में पिछड़ जाता है। बुआई के वक्त ही जिंक का प्रयोग सबसे ज्यादा असरदार होता है, लेकिन अगर किसान उस समय चूक गए हैं तो पहली सिंचाई के दौरान भी इसकी भरपाई की जा सकती है।
कैसे पहचानें कि आपकी फसल में है जिंक की कमी?
खेत में जिंक की कमी होते ही पौधे अपनी पत्तियों के जरिए इशारे देने लगते हैं।
पत्तियों पर पीली धारियां: पौधे की पत्तियों पर नसों के समानांतर पीली-सफेद धारियां दिखाई देने लगती हैं, जबकि नसें हरी ही रहती हैं।
बढ़त रुक जाना: पौधे छोटे रह जाते हैं और खेत के कुछ हिस्सों में फसल पैच में कमजोर नजर आती है।
कम कल्ले और हल्के दाने: पौधे से फुटाव यानी कल्ले बहुत कम निकलते हैं। अंत में सिटों में दाने पतले और हल्के बनते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह- किस मात्रा में और कैसे करें इस्तेमाल?
कृषि वैज्ञानिकों ने जिंक के प्रयोग के लिए स्पष्ट मात्रा तय की है:
मृदा प्रयोग (खेत में डालने के लिए): बुआई या पहली सिंचाई के समय प्रति एकड़ 33 प्रतिशत वाले जिंक सल्फेट की 6 किलोग्राम मात्रा या 21 प्रतिशत वाले जिंक सल्फेट की 10 किलोग्राम मात्रा का प्रयोग करना चाहिए।
छिड़काव (स्प्रे विधि): यदि फसल 25 से 30 दिन की हो चुकी है और कमी के लक्षण दिख रहे हैं, तो 33 प्रतिशत जिंक सल्फेट की 800 ग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। इसके विकल्प के तौर पर 150 ग्राम चिलेटेड जिंक (Chelated Zinc) प्रति एकड़ इस्तेमाल किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पत्तियों पर छिड़काव हमेशा सुबह या ढलती शाम के समय ही करना चाहिए ताकि दवा का असर पूरा मिले।
मिट्टी जांच से बचेगा फिजूल खर्च
वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि बिना वजह अंधी खाद डालने के बजाय पहले अपने खेत की मिट्टी की जांच (Soil Testing) जरूर करवाएं। इससे जमीन में मौजूद पोषक तत्वों की वास्तविक स्थिति का पता चलता है और जरूरत के अनुसार ही खाद-उर्वरक पर पैसा खर्च होता है। किसी भी उत्पाद के इस्तेमाल से पहले पैकेट पर लिखे दिशानिर्देशों या स्थानीय कृषि अधिकारी की सलाह अवश्य लें।
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