Haryana News: प्रकृति की मार एक बार फिर हरियाणा के अन्नदाता पर भारी पड़ी है। चक्रवात अर्नब के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में अचानक बदले मौसम, तेज हवाओं और झमाझम बारिश ने खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल को तहस-नहस कर दिया है। खासकर गोहाना क्षेत्र में किसानों की महीनों की मेहनत आंखों के सामने मिट्टी में मिलती नजर आ रही है। खेतों में बिछ चुकी बासमती धान की फसल को देखकर किसानों की चिंताएं सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं।
जमीन पर बिछी फसल, बर्बाद हो रही लागत
गोहाना के ग्रामीण इलाकों में इस वक्त खेतों का नजारा बेहद डरावना है। जो धान कुछ दिन बाद सुनहरे आंचल की तरह घर आने वाला था, वह तेज हवाओं के थपेड़े सहन न कर सका। भारी बारिश के पानी में डूबने और हवा के कारण पौधे जमीन पर पूरी तरह लेट चुके हैं।
किसानों का कहना है कि कटाई के मुहाने पर खड़ी फसल के इस तरह गिरने से दानों में नमी बढ़ जाएगी, उनका रंग काला पड़ जाएगा और बाजार में उनकी सही कीमत नहीं मिल पाएगी। लागत निकालकर मुनाफा कमाने का सपना देख रहे किसानों के हाथ अब केवल निराशा लगी है। संकट की इस घड़ी में किसानों ने प्रदेश सरकार से तत्काल प्रभाव से गिरदावरी कराकर उचित मुआवजा देने की पुरजोर मांग उठाई है।
कृषि विभाग की एडवाइजरी: ऐसे मिलेगा बीमा क्लेम
किसानों के नुकसान को देखते हुए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरकत में आ गया है। विभाग ने प्रभावित किसानों के लिए जरूरी निर्देश जारी किए हैं। कृषि विभाग के एसडीओ राजेंद्र कुमार मेहरा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि केवल खड़े पौधे में बारिश लगने से बीमा का लाभ मिलना तकनीकी रूप से संभव नहीं होता।
हालांकि, यदि कटाई के बाद या पकने की अवस्था में तेज बारिश के कारण फसल खेतों में गिरकर खराब हो जाती है और किसान ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसल का बीमा करवा रखा है, तो वे तय समय के भीतर क्लेम के लिए आवेदन कर सकते हैं।
एसडीओ ने किसानों से अपील की है कि वे बिना देर किए टोल-फ्री नंबर 14447 पर कॉल करके अपनी फसल में हुए नुकसान का ब्योरा दर्ज करवाएं। शिकायत दर्ज होने के बाद बीमा कंपनी और कृषि विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन करेंगे, जिसके आधार पर किसानों को नियमानुसार आर्थिक राहत पहुंचाई जा सकेगी।
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